धूमेश्वर धाम से महाकाल तक 460 किमी पदयात्रा शुरू
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डबरा के धूमेश्वर धाम से उज्जैन महाकाल मंदिर तक 460 किलोमीटर लंबी धार्मिक पदयात्रा शुरू, श्रद्धालु विश्व शांति और सनातन एकता का संदेश दे रहे हैं।
यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत, भंडारे और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे भक्तों में उत्साह का माहौल है।
Dabra/ मध्यप्रदेश के Dhoomeshwar Dham से उज्जैन स्थित Mahakaleshwar Temple तक लगभग 460 किलोमीटर लंबी पदयात्रा गुरुवार सुबह श्रद्धा और भक्ति के माहौल में शुरू हुई। इस यात्रा का उद्देश्य विश्व शांति, जनकल्याण और सनातन समाज में एकता का संदेश देना है।
यात्रा का शुभारंभ सुबह करीब 8 बजे धूमेश्वर धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद किया गया। इस अवसर पर Aniruddh Van Maharaj के सानिध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ पदयात्रा की शुरुआत की। भक्तों में यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
महामंडलेश्वर अनिरुद्ध वन महाराज ने कहा कि यह पदयात्रा श्रद्धा, साधना और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन हिंदू समाज को जागृत करना, लोगों को धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना तथा समाज में एकता और सद्भाव का संदेश फैलाना है।
यह पदयात्रा धूमेश्वर धाम से निकलकर कई गांवों और शहरों से होकर गुजरेगी। यात्रा का मार्ग झाऊ-खडीचा, सांखनी, बसई, चक मियापुर, बनियानी, हथेड़ा, फूलपुर कांकर, इमलिया, मंगरौनी, नरवर, झरना सरकार, शिवपुरी, कोलारस, बदरवास, गुना, राघोगढ़, चाचौड़ा, ब्यावरा, पचोर, सारंगपुर, शाजापुर और मक्सी जैसे स्थानों से होकर गुजरेगा।
पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत और ठहरने की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय भक्तों द्वारा जगह-जगह भंडारे और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे यात्रा का माहौल और अधिक धार्मिक और उत्साहपूर्ण बना रहेगा।
इस धार्मिक यात्रा का समापन 24 मार्च को उज्जैन में होगा, जहां श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे और विश्व शांति तथा जनकल्याण के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
महामंडलेश्वर अनिरुद्ध वन महाराज ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पदयात्रा में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करें और समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में योगदान दें।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व वाली इस यात्रा को लेकर भक्तों में खास उत्साह है। आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश भी देगी।