Noney / सूत्रों के मुताबिक, मणिपुर के नोनी जिले में सोमवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कुकी उग्रवादी संगठन चिन कुकी मिजो आर्मी (CKMA) से जुड़े पांच सदस्यों की कथित तौर पर आंतरिक विवाद के चलते गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात देवाईजंग गांव में घटी, जो जिला मुख्यालय नुनी से लगभग 53 किलोमीटर दूर स्थित एक दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र है। इस घटना ने मणिपुर में पहले से ही तनावपूर्ण हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मारे गए सभी पांचों युवक CKMA संगठन से जुड़े हुए थे। यह संगठन लगभग दो वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया था और केंद्र सरकार के साथ 2008 में किए गए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स (SoO) समझौते का हिस्सा नहीं है, यानी वह किसी भी औपचारिक संघर्ष विराम या शांति समझौते से संबद्ध नहीं है। इसी कारण संगठन की गतिविधियाँ और आंतरिक संरचना को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता भी नहीं रही है।
पुलिस का कहना है कि अभी तक इस सामूहिक हत्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ पाई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह मामला संगठन के भीतर चल रहे आपसी मतभेदों और वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह एक सुनियोजित हमला था, जो संगठन के भीतर पनप रही गुटबाजी की चरम परिणति के रूप में देखा जा सकता है। पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और अन्य संभावित हमलों की आशंका के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है।
घटना के बाद CKMA संगठन ने भी अपने एक बयान में इस हत्याकांड की पुष्टि की है। संगठन ने अपनी स्थानीय भाषा में जारी किए गए बयान में कहा है कि “कुछ गलतफहमियों और दुर्भावनाओं” की वजह से उनके पांच साथियों की जान चली गई। संगठन ने इसे न केवल संगठन के लिए बल्कि समूचे समुदाय के लिए एक ‘बड़ी क्षति’ बताया है। यह बयान दर्शाता है कि CKMA भी आंतरिक खेमेबंदी और रणनीतिक असहमति की समस्या से जूझ रहा है।
मणिपुर पहले से ही जातीय संघर्ष, सामाजिक तनाव और उग्रवाद से जूझता रहा है। यहां कुकी, मैतेई और नागा समुदायों के बीच ऐतिहासिक रूप से विवाद होते रहे हैं, जो समय-समय पर हिंसक झड़पों का रूप ले लेते हैं। इसी पृष्ठभूमि में CKMA के भीतर हुई यह हिंसा राज्य की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और उजागर करती है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की जल्द पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और राज्य में शांति बहाल हो सके।
यह घटना मणिपुर में जारी सामाजिक-राजनीतिक संकट की एक और भयावह कड़ी है, जो यह दिखाती है कि संगठनों के भीतर असहमति किस कदर घातक रूप ले सकती है। इस हत्याकांड से ना केवल CKMA के कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हुआ है, बल्कि यह राज्य की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक क्षमताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।