स्लिनेक्स-26 में क्या होगा? भारत-श्रीलंका समुद्री अभ्यास ‘स्लिनेक्स-26’ शुरू

Sun 20-Sep-2026,10:29 PM IST +05:30

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स्लिनेक्स-26 में क्या होगा? भारत-श्रीलंका समुद्री अभ्यास ‘स्लिनेक्स-26’ शुरू  CLINEX 2026
  • भारत-श्रीलंका के बीच ‘स्लिनेक्स-26’ का 13वां संस्करण विशाखापत्तनम में शुरू हुआ।

  • भारतीय नौसेना के आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस ज्योति अभ्यास में शामिल हैं।

  • समुद्री चरण में दोनों नौसेनाएं संयुक्त गतिविधियों से परिचालन समन्वय मजबूत करेंगी।

Andhra Pradesh / Visakhapatnam :

Visakhapatnam / भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘स्लिनेक्स-26’ का 13वां संस्करण विशाखापत्तनम में शुरू हो गया है। यह अभ्यास 17 से 21 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। अभ्यास की शुरुआत बंदरगाह चरण से हुई है, जिसके बाद समुद्री चरण आयोजित किया जाएगा। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समन्वय, परिचालन समझ और समुद्री सहयोग को मजबूत करना इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य है।

‘स्लिनेक्स-26’ में भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आईएनएस कवरत्ती और बेड़े का टैंकर जहाज आईएनएस ज्योति हिस्सा ले रहे हैं। वहीं श्रीलंका नौसेना का प्रतिनिधित्व एसएलएनएस सिंदुराला कर रहा है। दोनों देशों के पोतों की भागीदारी के जरिए नौसैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और संचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा।

अभ्यास के बंदरगाह चरण की शुरुआत आईएनएस कवरत्ती पर एसएलएनएस सिंदुराला के चालक दल के लिए आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम और स्वागत समारोह के साथ हुई। पूर्वी नौसेना कमान की देखरेख में आयोजित इस चरण में दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच पेशेवर संवाद और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

बंदरगाह चरण के दौरान दोनों नौसेनाओं के जवान एक-दूसरे के पोतों का दौरा करेंगे और अपनी-अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करेंगे। इसके अलावा योग, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी संपर्क और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसे कार्यक्रम सैन्य सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच पारस्परिक समझ को भी मजबूत करने में भूमिका निभाते हैं।

इसके बाद अभ्यास का समुद्री चरण आयोजित किया जाएगा। इस दौरान दोनों नौसेनाएं समुद्र में संयुक्त गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। समुद्री चरण का मुख्य फोकस परिचालन समन्वय और आपसी सहभागिता को बेहतर बनाना होगा। इसके जरिए दोनों देशों के नौसैनिकों को वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ काम करने और संचालन संबंधी अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा।

‘स्लिनेक्स’ की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। तब से यह भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। समय के साथ इस अभ्यास ने दोनों देशों के बीच आपसी सहभागिता, पेशेवर समझ और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

भारत के महासागर दृष्टिकोण के अनुरूप ‘स्लिनेक्स-26’ सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री वातावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से नौसेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और पारस्परिक विश्वास विकसित करने में मदद मिलती है।

पांच दिवसीय ‘स्लिनेक्स-26’ के जरिए भारत और श्रीलंका अपनी लंबे समय से चली आ रही समुद्री साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं। बंदरगाह से लेकर समुद्र तक होने वाली विभिन्न गतिविधियां दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेंगी।