अंगदान को लेकर MP में जागरूकता की जरूरत, विज्ञान और आस्था के बीच संवाद जरूरी

Sat 19-Sep-2026,06:44 PM IST +05:30

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अंगदान को लेकर MP में जागरूकता की जरूरत, विज्ञान और आस्था के बीच संवाद जरूरी Madhya Pradesh Organ Donation
Madhya Pradesh / Bhopal :

Bhopal / अंगदान सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था का विषय नहीं है। यह इंसानी संवेदना, सामाजिक जिम्मेदारी और हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ सवाल है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और आस्था को एक-दूसरे के सामने खड़ा करने के बजाय दोनों के बीच संवाद जरूरी है। मध्य प्रदेश के आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में देश में कुल 16,542 डोनर्स दर्ज हुए। इनमें 1,099 डिसीस्ड डोनर्स यानी मस्तिष्क-मृत घोषित किए गए दाताओं का योगदान था। इसी वर्ष देश में 18,378 ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश में 2021 में 172, 2022 में 236 और 2023 में 281 ऑर्गन डोनेशन दर्ज किए गए।

कैडवेरिक डोनेशन के आंकड़े तस्वीर को और स्पष्ट करते हैं। जनवरी 2018 से जून 2023 के बीच मध्य प्रदेश में सिर्फ 25 कैडवेरिक डोनेशन दर्ज हुए, जबकि इसी अवधि में तेलंगाना में 883 और तमिलनाडु में 713 ऐसे डोनेशन हुए। यह अंतर केवल अस्पतालों की उपलब्धता या चिकित्सा सुविधाओं से नहीं समझा जा सकता। ब्रेन-डेथ की समय पर पहचान, परिवार की सहमति, प्रशिक्षित मेडिकल टीम और अंगों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आस्था से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
अंगदान को लेकर कई परिवारों के मन में धार्मिक और भावनात्मक सवाल होते हैं। कुछ लोगों को आशंका रहती है कि मृत्यु के बाद अंगदान करने से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है या आत्मा की यात्रा में बाधा आ सकती है। ऐसे सवालों को अंधविश्वास कहकर खारिज करने के बजाय संवेदनशीलता के साथ समझना जरूरी है। किसी परिवार के लिए धर्म और आस्था बेहद निजी विषय होते हैं।

हिंदू दर्शन में भगवद्गीता के दूसरे अध्याय में शरीर की नश्वरता और आत्मा की निरंतरता का वर्णन मिलता है। पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र धारण करने का उदाहरण शरीर और आत्मा के अंतर को समझाने के लिए दिया गया है। इस दर्शन की एक सहज व्याख्या यह हो सकती है कि शरीर की भौतिक अवस्था और आत्मा की आध्यात्मिक यात्रा को एक ही दृष्टि से देखना आवश्यक नहीं है।

हालांकि, किसी धार्मिक ग्रंथ की व्याख्या के आधार पर यह दावा करना उचित नहीं होगा कि अंगदान करने से किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से मोक्ष मिलेगा या अगले जन्म में कोई विशेष फल प्राप्त होगा। ये व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक व्याख्या के विषय हैं। अंगदान के प्रति जागरूकता का सबसे स्पष्ट आधार मानव जीवन बचाने की संभावना है।

दधीचि और राजा शिवि की कथाओं से प्रेरणा
भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में ऋषि दधीचि और राजा शिवि की कथाएं त्याग और परोपकार की भावना को सामने रखती हैं। आधुनिक अंगदान को इन कथाओं से जोड़ते समय यह समझना जरूरी है कि ये आज की चिकित्सा प्रक्रिया के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं। इन्हें त्याग, सेवा और दूसरों के कल्याण की सांस्कृतिक प्रेरणा के रूप में देखा जा सकता है।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इस भावना को एक व्यावहारिक रास्ता दिया है। अंगदान के बाद निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जाती है और शरीर को सम्मानपूर्वक परिवार को सौंपा जाता है। इसके बाद परिवार अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकता है। इसलिए परिवारों तक यह जानकारी पहुंचाना जरूरी है कि अंगदान और सम्मानजनक अंतिम संस्कार एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

मध्य प्रदेश में सामूहिक प्रयास की जरूरत
अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने में डॉक्टरों के साथ धर्मगुरुओं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च और अन्य सामुदायिक संस्थाएं अपने अनुयायियों के बीच मानव जीवन के सम्मान, सेवा और करुणा का संदेश पहुंचा सकती हैं।

जरूरत इस बात की है कि किसी एक धर्म की व्याख्या को सभी पर लागू करने के बजाय अलग-अलग आस्थाओं का सम्मान करते हुए संवाद किया जाए। डॉक्टर परिवारों को अंगदान की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े चिकित्सकीय तथ्यों की जानकारी दें, वहीं धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व लोगों की आशंकाओं को समझने और दूर करने में सहयोग कर सकता है।

मौत के बाद भी जीवन देने की संभावना
अंगदान का सवाल आखिरकार केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि मृत्यु के बाद शरीर का क्या होगा। इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी व्यक्ति के जाने के बाद उसके अंग किसी दूसरे इंसान को जीवन का एक और मौका दे सकते हैं।

विज्ञान इस संभावना को संभव बनाता है और मानवीय संवेदना उसे अर्थ देती है। मध्य प्रदेश में अंगदान की संख्या बढ़ाने के लिए बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के साथ सामाजिक विश्वास और जागरूकता का निर्माण भी उतना ही जरूरी है। विज्ञान और आस्था के बीच संवाद की यही राह कई जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकती है।