दक्षिणी राज्यों को कृषि लक्ष्य समय पर पूरा करने का निर्देश, शिवराज चौहान बोले- परिणाम देना है
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Regional Agriculture Conference
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कृषि लक्ष्यों को तय समयसीमा में पूरा करने को कहा।
फार्मर आईडी, एग्री स्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए।
भारत विस्तार को 13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
New Delhi / केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों से कृषि क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्यों और सम्मेलन के दौरान किए गए कमिटमेंट को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को कहा है। हैदराबाद में आयोजित दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें से एक्शनएबल प्वाइंट्स पर अब गंभीरता से काम होना चाहिए। उन्होंने केंद्र, राज्य सरकारों, वैज्ञानिकों और किसानों को एक साथ मिलकर कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया।
केंद्र और राज्य मिलकर काम करें
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर एक ‘एग्रीकल्चर टीम’ हैं। इसमें वैज्ञानिक, किसान, केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी सभी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। राज्यों ने जिन कार्यों को पूरा करने की समयसीमा तय की है, उन्हें उसी समय सीमा में पूरा करना जरूरी है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी राज्य ने दिसंबर तक फार्मर आईडी का काम पूरा करने का कमिटमेंट किया है तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग विषयों को बार-बार दोहराने के बजाय अब उन पर कार्रवाई और परिणाम दिखाई देने चाहिए।
‘ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग’ नहीं, परिणाम जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि सम्मेलन के बाद तय किए गए काम जमीन पर नहीं उतरते हैं तो पूरी कवायद बेकार हो जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल एक दिन बैठक करना, चर्चा करना और वापस चले जाना पर्याप्त नहीं है। उनका जोर इस बात पर रहा कि सम्मेलन के फैसलों का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कृषि की स्थिति में बदलाव लाने के लिए केंद्र और राज्यों की टीम को मिलकर काम करना होगा। विकसित कृषि संकल्प अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा तारीख तय किए जाने पर भारत सरकार और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक गांवों और खेतों तक जाएंगे। वहां किसान, वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी साथ बैठकर समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे।
फार्मर आईडी और एग्री स्टैक पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने फार्मर आईडी और एग्री स्टैक को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि फार्मर आईडी बनाने की दिशा में कई राज्यों ने अच्छी प्रगति की है। तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से अधिक कवरेज तक पहुंच चुके हैं। वहीं डिजिटल क्रॉप सर्वे में अंडमान और निकोबार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है।
उन्होंने कहा कि केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में फार्मर आईडी के काम को और तेजी देने की जरूरत है। आने वाले समय में कृषि क्षेत्र की कई व्यवस्थाएं फार्मर आईडी से जुड़ेंगी, इसलिए कोई भी राज्य पीछे नहीं रहना चाहिए।
लैंड रिकॉर्ड और किसान रजिस्ट्री के बीच समन्वय
केंद्रीय मंत्री ने तमिलनाडु और केरल में लैंड पार्सल को जोड़ने के काम में तेजी लाने की जरूरत बताई। उन्होंने केरल में लैंड रिकॉर्ड डेटा को किसान रजिस्ट्री के साथ जोड़ने पर भी जोर दिया। दक्षिणी राज्यों में टेनेंट फार्मर्स यानी बटाईदार और किरायेदार किसानों के लिए एसओपी तैयार कर उसे अधिसूचित करने की बात भी कही गई।
कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और अंडमान एवं निकोबार को इस दिशा में काम करने की जरूरत बताई गई। वहीं पुडुचेरी और लक्षद्वीप में गांवों के नक्शों की जियो-रिफरेंसिंग का काम पूरा करने पर जोर दिया गया।
13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा भारत विस्तार
शिवराज सिंह चौहान ने ‘भारत विस्तार’ व्यवस्था को किसानों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इसे 13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। फिलहाल यह हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और उसी भाषा में कृषि संबंधी सलाह प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने राज्यों की योजनाओं को भी इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत बताई। केंद्र सरकार ने पहले भी Bharat-VISTAAR को कृषि से जुड़ी जानकारी, सलाह और सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से किसानों तक पहुंचाने वाले एआई आधारित प्लेटफॉर्म के रूप में आगे बढ़ाया है।
‘लैब से लैंड’ तक पहुंचे कृषि अनुसंधान
केंद्रीय मंत्री ने कृषि अनुसंधान को किसानों के खेतों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में करीब 16 हजार वैज्ञानिक हैं और ICAR के संस्थान, KVK तथा कृषि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल रिसर्च करना नहीं, बल्कि उसके परिणामों को किसानों तक पहुंचाना भी है।
उन्होंने कहा कि जब किसान और वैज्ञानिक एक साथ बैठेंगे और शोध को खेत तक पहुंचाया जाएगा, तभी ‘लैब टू लैंड’ का उद्देश्य पूरा होगा।
28-29 सितंबर को दिल्ली में रबी कॉन्फ्रेंस
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली के पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी। इसमें राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी टीमों के साथ रबी सीजन की तैयारी का पूरा प्लान लेकर आएंगे। सम्मेलन में यह तय किया जाएगा कि रबी सीजन में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी।
इसी आधार पर बीज, उर्वरक और अन्य जरूरी कृषि संसाधनों की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। दक्षिण क्षेत्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के अलावा दक्षिणी राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव अतीश चंद्रा तथा DARE सचिव और ICAR महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय कृषि बैठक में डिजिटल कृषि, किसान रजिस्ट्री, फार्मर आईडी, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षेत्रीय भाषाओं में कृषि सलाह जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से सम्मेलन में तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने और उनके परिणाम किसानों तक पहुंचाने की अपेक्षा जताई।