अरनमुला वल्लमकली का शुभारंभ, बोले सीपी राधाकृष्णन- विविधता भारत की ताकत
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Arammula Vallamkali
पंबा नदी पर भव्य नौका उत्सव का शुभारंभ।
ओणम, वल्लासद्या और अरनमुला कन्नाडी की महत्ता बताई।
सी.पी. राधाकृष्णन ने विविधता को देश की ताकत बताया।
New Delhi / उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने पंबा नदी पर आयोजित अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने इस प्रसिद्ध नौका उत्सव को केरलम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भक्ति, परंपरा और सामुदायिक भावना का गौरवशाली प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अरनमुला वल्लमकली केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता को जीवंत बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।
उपराष्ट्रपति ने हाल ही में राज्य का नाम बदलकर केरलम किए जाने पर प्रदेश की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्हें हाल ही में समाप्त हुए सत्र के दौरान राज्य का नाम बदलने वाले विधेयक को पारित कराने का अवसर मिला। उन्होंने प्रदेशवासियों को ओणम की शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि ऐसे त्योहार भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को मजबूत करते हैं।
श्री राधाकृष्णन ने अरनमुला वल्लमकली के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन ओणम तथा वल्लासद्या की पवित्र परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। पल्लियोडम नाम से प्रसिद्ध खूबसूरती से सजी नौकाओं में सौ से अधिक नाविक एक साथ लयबद्ध तरीके से नौका चलाते हैं। उन्होंने इसे टीम वर्क, अनुशासन, समन्वय और खेल भावना का शानदार उदाहरण बताया। उनके अनुसार, नाविकों का सामूहिक प्रयास इस आयोजन को केवल दर्शनीय ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी बनाता है।
उपराष्ट्रपति ने पंबा नदी के आध्यात्मिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नदी सबरीमाला तीर्थयात्रा का अभिन्न हिस्सा है और आस्था, पवित्रता तथा आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। श्री राधाकृष्णन ने अपनी सात सबरीमाला यात्राओं को याद करते हुए कहा कि संसद सदस्य के रूप में नामांकन से कुछ समय पहले की गई उनकी पहली तीर्थयात्रा उनके लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने अपने विश्वास का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान अय्यप्पा के आशीर्वाद ने उनकी चुनावी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अरनमुला की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने प्राचीन श्री पार्थसारथी मंदिर और प्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त अरनमुला कन्नाडी की विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उपराष्ट्रपति आवास पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने अतिथियों को अरनमुला कन्नाडी भेंट की थी। इसकी उत्कृष्ट कारीगरी और विशिष्टता की अतिथियों ने सराहना की थी। उन्होंने कहा कि देश की पारंपरिक कलाओं, शिल्पों और ज्ञान प्रणालियों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि विदेशों में काम करने वाले लोग भी अपनी प्रिय सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल होने के लिए वापस लौटते हैं। अरनमुला इसका उदाहरण है कि किस तरह संस्कृति और परंपराएं लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं।
उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के अलग-अलग त्योहार देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारी विविधता विभाजन का स्रोत नहीं है; यह हमारी शक्ति का स्रोत है।”
कार्यक्रम में केरलम के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, गृह मंत्री श्री रमेश चेन्निथला, उच्च शिक्षा मंत्री श्री रोजी एम. जॉन, जल संसाधन मंत्री श्री मॉन्स जोसेफ, सांसद श्री एंटो एंटनी, अरनमुला के विधायक श्री अभिन वर्की सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।