CM Yogi Adityanath Statement: अंसारी के बयान से क्यों गरमाई सियासत?
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Hamid Ansari Controversy
हामिद अंसारी के बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया दी।
योगी ने संवैधानिक पद की गरिमा और देश की एकता पर जोर दिया।
अंसारी ने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर नेहरू के पुराने कथन का हवाला दिया।
Greater Noida / पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हालिया बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ग्रेटर नोएडा में अंसारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से उस पद की गरिमा के अनुरूप सार्वजनिक आचरण की अपेक्षा की जाती है। योगी ने अंसारी की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भारत, भारतीय संस्कृति और परंपरा के संदर्भ में उनके विचारों पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी राय अलग हो सकती है, लेकिन देश से जुड़े विषयों पर बोलते समय भारत की एकता और अखंडता तथा संविधान की भावना को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी की टिप्पणी भारतीय सनातन और हिंदू परंपराओं को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। योगी ने यह भी कहा कि ऐसी टिप्पणियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित करने की कोशिशों को बल मिल सकता है। ये आरोप मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए हैं।
दरअसल, हामिद अंसारी ने 19 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का उल्लेख किया था। उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक The RSS: A Menace to India का संदर्भ देते हुए कहा था कि नेहरू ने भारत के लिए साम्यवाद के बजाय हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को खतरा बताया था। अंसारी ने अपने संबोधन में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
अंसारी की इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं और अन्य संगठनों की ओर से आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। वहीं अंसारी के बयान का संदर्भ उनके संबोधन में एजी नूरानी के विचारों और नेहरू से जुड़े ऐतिहासिक उल्लेखों से था। इसलिए पूरे विवाद को समझने के लिए उनके बयान के मूल संदर्भ को भी देखना जरूरी है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में संवैधानिक संस्थाओं और पदों की गरिमा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर रहने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि सार्वजनिक जीवन में देश की एकता और अखंडता के प्रति जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है।
हामिद अंसारी की टिप्पणी और उस पर योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विवाद के केंद्र में भारत में राष्ट्रवाद की अवधारणा, सांप्रदायिकता, संवैधानिक मर्यादा और सार्वजनिक पदों से जुड़े आचरण जैसे मुद्दे हैं।