WHO ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) को क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र का दर्जा दिया, दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बड़ी उपलब्धि

Wed 05-Aug-2026,11:23 PM IST +05:30

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WHO ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) को क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र का दर्जा दिया, दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बड़ी उपलब्धि Indian Pharmacopoeia Commission
  • WHO ने IPC को क्षेत्रीय फार्माकोविजिलेंस उत्कृष्टता केंद्र का दर्जा दिया।

  • SEARN बैठक में भारत की दवा गुणवत्ता और नियामक क्षमता को मिली वैश्विक मान्यता।

  • दक्षिण-पूर्व एशिया में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के लिए भारत की भूमिका मजबूत।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / भारत को वैश्विक स्वास्थ्य और दवा नियमन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (Indian Pharmacopoeia Commission-IPC) को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया नियामक नेटवर्क (SEARN) द्वारा क्षेत्रीय फार्माकोविजिलेंस उत्कृष्टता केंद्र (Regional Pharmacovigilance Centre of Excellence) और गुणवत्ता तकनीकी केंद्र (Quality Technical Centre) के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। यह सम्मान 4-5 अगस्त 2026 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित SEARN की 10वीं वर्षगांठ बैठक के दौरान दिया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों (NRA), फार्माकोपिया संस्थानों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग के दस वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के साथ-साथ दवाओं और अन्य चिकित्सीय उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियामक प्रणालियों को और मजबूत बनाना था।

SEARN की स्थापना वर्ष 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (SEARO) द्वारा की गई थी। यह मंच सदस्य देशों के बीच ज्ञान साझा करने, नियामकीय प्रक्रियाओं में सामंजस्य स्थापित करने, क्षमता निर्माण और नियामक सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य करता है। नेटवर्क गुणवत्ता आश्वासन, फार्माकोविजिलेंस, क्लिनिकल ट्रायल निगरानी, चिकित्सा उपकरणों के नियमन और नियामकीय तैयारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य करता है।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने किया। उनके साथ वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. जय प्रकाश, डॉ. रॉबिन कुमार और वैज्ञानिक अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा भी शामिल रहे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दवा नियामक प्रणाली को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्यपूर्ण गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा देने में भारत की उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया।

आईपीसी ने बैठक में भारतीय फार्माकोपिया, भारतीय फार्माकोपिया संदर्भ पदार्थ (IPRS), अशुद्धि संदर्भ मानक (IMPRS), भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (PvPI) और मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MvPI) सहित विभिन्न पहलों की जानकारी साझा की। इसके अलावा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रयासों को भी प्रस्तुत किया गया।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि आईपीसी को WHO-SEARN क्षेत्रीय फार्माकोविजिलेंस उत्कृष्टता केंद्र और गुणवत्ता तकनीकी केंद्र के रूप में मिली मान्यता रही। यह सम्मान फार्माकोविजिलेंस प्रणाली को मजबूत करने, दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सदस्य देशों की नियामक क्षमता बढ़ाने में भारत के निरंतर योगदान की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत की भूमिका और अधिक मजबूत होगी तथा सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग बढ़ेगा।

बैठक के दौरान वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान, नियामकीय अनुभव साझा करने, गुणवत्ता आश्वासन, डिजिटल परिवर्तन, दवा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी व्यापक चर्चा हुई। भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने दोहराया कि वह WHO-SEARN की पहलों का सक्रिय समर्थन जारी रखेगा और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दवा नियमन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य करता रहेगा। यह उपलब्धि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की बढ़ती नेतृत्व क्षमता और विश्वसनीयता का एक और महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जा रही है।