भारत का रेशम उत्पादन 60 हजार टन कैसे होगा? किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
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Silk Production India
भारत का रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया।
सरकार ने रेशम किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया।
एआई, जीआईएस और मशीन लर्निंग से रेशम उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की तैयारी है।
New Delhi / बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस कार्यक्रम और रेशम उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने यूएएस-जीकेवीके सभागार में कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से आए रेशम उत्पादक किसानों और बुनकरों ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार देश में रेशम उत्पादन के विस्तार और रेशम किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि देश का रेशम उत्पादन वर्ष 2014 में करीब 26 हजार मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 42 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। सरकार ने वर्ष 2030-31 तक इसे 60 हजार मीट्रिक टन तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत को 2028-29 तक वैश्विक स्तर पर रेशम उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाने और रेशम के कीड़ों के पालन के चक्रों में वृद्धि करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की आकांक्षा है कि इन उपायों से रेशम उत्पादक किसानों की वार्षिक आय को करीब 10 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये तक करने में मदद मिले।
मंत्री ने रेशम उत्पादक किसानों के बीच प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान’ पुरस्कार प्रतियोगिताएं आयोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीक, संकर किस्में और आधुनिक मशीनरी का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है। ऐसे समय में जब चीन के रेशम उत्पादन में कमी की बात सामने आ रही है, भारत के लिए वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर है। सरकार रेशम उत्पादन से लेकर कताई और बुनाई तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कर्नाटक देश के रेशम उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को मजबूत करने के साथ आधुनिक तकनीकों और उच्च उत्पादन विधियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाले रेशम उत्पादन से घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (रेशम) पद्मिनी सिंगला ने बताया कि 2030-31 तक 60 हजार मीट्रिक टन उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च उपज वाली संकर रेशमकीट प्रजातियों और आधुनिक मशीनों को अपनाया जा रहा है। गुणवत्ता जांच और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एआई, जीआईएस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों को भी क्षेत्र से जोड़ा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान सिल्क बोर्ड और विभिन्न संगठनों के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इसके अलावा 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र दिए गए तथा उत्कृष्ट कर्मचारियों और हितधारकों को पुरस्कार प्रदान किए गए। बोर्ड के विभिन्न प्रकाशनों और पत्रिकाओं का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के रेशम उत्पादक तथा बुनकर शामिल हुए।