ड्रोनाथॉन-2026: पोखरण में IAF ने दिखाई स्वदेशी ड्रोन तकनीक की ताकत

Mon 14-Sep-2026,11:32 PM IST +05:30

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ड्रोनाथॉन-2026: पोखरण में IAF ने दिखाई स्वदेशी ड्रोन तकनीक की ताकत Droneathon 2026
  • पोखरण में पहले भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन-2026 का शुभारंभ, 20 से अधिक रक्षा कंपनियां और स्टार्ट-अप ले रहे हिस्सा।

  • ड्रोनाथॉन में स्वायत्त संचालन, स्वार्म तकनीक, निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काउंटर-यूएएस क्षमताओं का प्रदर्शन।

  • ‘वायु उत्तम’ यूटीएम प्रणाली का सफल प्रदर्शन, ड्रोन सुरक्षा और हवाई क्षेत्र प्रबंधन में बढ़ेगी स्वदेशी क्षमता।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / भारतीय वायु सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और परिचालन क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 14 सितंबर 2026 को जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में पहले भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन-2026 का शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्रालय, एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय, भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। तीन दिवसीय यह आयोजन 14 से 16 सितंबर तक चलेगा, जिसमें देश के मानवरहित हवाई प्रणालियों से जुड़े रक्षा उद्योग, स्टार्ट-अप और नवोन्मेषक हिस्सा ले रहे हैं।

वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में तकनीक का परीक्षण
ड्रोनाथॉन-2026 का उद्देश्य केवल नई तकनीकों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में परखना है। इस आयोजन में 20 से अधिक प्रमुख रक्षा कंपनियां, स्टार्ट-अप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और नवोन्मेषक अपनी मानवरहित विमान प्रणालियों और संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

भारतीय वायु सेना मानवरहित प्रणालियों को मानव-संचालित विमानों का महत्वपूर्ण पूरक मानती है। इन प्रणालियों के माध्यम से हवाई अभियानों में पहुंच, निगरानी, निरंतरता, कार्रवाई क्षमता और परिचालन लचीलेपन को बढ़ाया जा सकता है। यही कारण है कि ड्रोनाथॉन के दौरान विभिन्न परिस्थितियों में इन प्रणालियों की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता का परीक्षण किया जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान निगरानी और टोह लेने, स्वायत्त संचालन, स्वार्म टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा काउंटर-यूएएस जैसी क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इन परीक्षणों का एक प्रमुख उद्देश्य यह देखना है कि मानवरहित प्रणालियां चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किस तरह काम करती हैं और बदलती परिचालन जरूरतों तथा उभरते खतरों के अनुसार कितनी तेजी से अनुकूलित हो सकती हैं।

जारी हुआ मानवरहित वायु प्रणालियों का रोडमैप
कार्यक्रम के दौरान एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने ‘भारतीय वायु सेना मानवरहित वायु प्रणालियों का रोडमैप’ भी जारी किया। इस रोडमैप के माध्यम से भारतीय रक्षा उद्योग को भविष्य में आवश्यक मानवरहित क्षमताओं और प्राथमिकताओं की दिशा स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

इसका उद्देश्य उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों को भारतीय वायु सेना की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी तकनीक, अनुसंधान और नवाचार विकसित करने में मदद करना है। इससे स्वदेशी तकनीकों के विकास और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और गति मिलने की उम्मीद है।

‘वायु उत्तम’ ने दिखाई अहम क्षमता
ड्रोनाथॉन-2026 के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित बहु-आयामी मानवरहित हवाई यातायात प्रबंधन प्रणाली ‘वायु उत्तम’ की महत्वपूर्ण क्षमता का वास्तविक समय में प्रदर्शन किया। पोखरण में हुए प्रदर्शन के दौरान इस प्रणाली ने सैन्य और असैन्य दोनों प्रकार की मानवरहित विमान प्रणालियों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने की क्षमता प्रदर्शित की।

बढ़ती ड्रोन गतिविधियों और भीड़भाड़ वाले हवाई क्षेत्र को देखते हुए यह तकनीक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ‘वायु उत्तम’ अनधिकृत या खतरनाक ड्रोन की पहचान करने और समय रहते उनसे निपटने में सहायता कर सकती है। इसका संभावित उपयोग केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। हवाई क्षेत्र की सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, नागरिक विमानन और जनसुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूरे ड्रोन इकोसिस्टम पर जोर
ड्रोनाथॉन-2026 भारतीय वायु सेना की मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसमें केवल ड्रोन के एयरफ्रेम पर नहीं, बल्कि पूरे तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें प्रोपल्शन सिस्टम, सेंसर और पेलोड, संचार व्यवस्था, स्वायत्तता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, प्रतिरोधी उपाय और हवाई क्षेत्र प्रबंधन जैसी क्षमताएं शामिल हैं।

इस पहल से भारतीय रक्षा उद्योग और नवोन्मेषकों को वास्तविक परिस्थितियों में अपनी तकनीकों को परखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, भारतीय वायु सेना को भविष्य के हवाई अभियानों के लिए स्वदेशी और प्रभावी मानवरहित समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। ड्रोनाथॉन-2026 इस दिशा में उद्योग, सेना और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच बनकर उभर रहा है।