एम्स रायपुर दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का संदेश, युवाओं से निभाने को कहा बड़ी जिम्मेदारी

Wed 02-Sep-2026,11:28 PM IST +05:30

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एम्स रायपुर दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का संदेश, युवाओं से निभाने को कहा बड़ी जिम्मेदारी AIIMS Raipur
  • उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवा स्नातकों को सेवा और जिम्मेदारी का संदेश दिया।

  • एम्स रायपुर की चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और प्रत्यारोपण उपलब्धियों की सराहना की।

  • समारोह में 689 स्नातकों को डिग्री, जबकि मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक मिले।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur / उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने एम्स रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए नवस्नातक चिकित्सकों और छात्रों से देशवासियों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है। डिग्री मिलने के बाद स्नातकों को जनता के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा का दायित्व निभाना होगा।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से संस्थान ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कम समय में एम्स रायपुर छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। संस्थान ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने में भी योगदान दे रहा है।

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित आवागमन और वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौतियों ने लंबे समय तक विकास को प्रभावित किया। इन परिस्थितियों में दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना कठिन रहा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अतीत की चुनौतियों से निकलकर विकास, समृद्धि और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को दिया। उनके अनुसार, जिन क्षेत्रों की पहचान कभी हिंसा से होती थी, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों की चर्चा हो रही है।

उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ की प्रगति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उपलब्धियों की भी सराहना की। छत्तीसगढ़ में पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ने का संकेत मिलता है। हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संतुलित विकास तभी संभव है, जब प्रत्येक राज्य, जिला और गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े। उन्होंने उच्च शिक्षा को इस लक्ष्य की बुनियाद बताया और पिछले वर्षों में उच्च शिक्षा के विस्तार तथा महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। एम्स रायपुर के इस दीक्षांत समारोह में भी 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री प्रदान की गई।

युवा स्नातकों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने नशीली दवाओं से दूर रहने और तकनीक तथा ज्ञान के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्नातकों का ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, शोध नवाचार लाए और उनकी सेवा दूसरों के लिए प्रेरणा बने।

समारोह में मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव हांडा और कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।