केरल कौमुदी की 115वीं वर्षगांठ पर बोले उपराष्ट्रपति, पत्रकारिता में जनविश्वास सर्वोपरि
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Kerala Kaumudi Anniversary
केरल कौमुदी ने 115 वर्षों में सामाजिक जागृति में अहम योगदान दिया।
उपराष्ट्रपति ने पत्रकारिता में सत्य और जनविश्वास को सर्वोपरि बताया।
मीडिया से नवाचार, वैज्ञानिक उपलब्धियों और सकारात्मक बदलाव को सामने लाने की अपील की।
Kerala Kaumudi / उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने अलप्पुझा में केरल कौमुदी के 115वीं वर्षगांठ समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने समाचार पत्र की 115 वर्षों की यात्रा को विश्वास, साहस और विचारों की स्थायी शक्ति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक किसी समाचार पत्र की निरंतर यात्रा उसके प्रति जनता के विश्वास और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है।
उपराष्ट्रपति ने केरल कौमुदी के संस्थापक श्री सी.वी. कुन्हीरामन को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1911 में स्थापित इस समाचार पत्र ने सामाजिक जागृति पैदा करने के साथ-साथ वंचित और शोषित वर्गों की आवाज को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना और जनहित से जुड़े विषयों पर जागरूकता पैदा करना भी है।
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने केरलम के लोगों को राज्य का नाम बदलने पर भी बधाई दी। उन्होंने याद किया कि 12 अगस्त, 2026 को जब इससे संबंधित विधेयक पारित हुआ, तब वे राज्यसभा की अध्यक्षता कर रहे थे। उनके अनुसार, उस दौरान सदस्यों के बीच दिखाई दी खुशी एक ऐतिहासिक त्रुटि के सुधार की भावना को प्रतिबिंबित करती थी।
उन्होंने भारत में केरलम के योगदान को रेखांकित करते हुए आदि शंकराचार्य, श्री नारायण गुरु और मन्नथु पद्मनाभन के कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने एकता का संदेश दिया, श्री नारायण गुरु ने समानता की भावना को आगे बढ़ाया और मन्नथु पद्मनाभन ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ये योगदान देश के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में केरलम की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं।
पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया का स्वरूप प्रिंट से टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच गया है। हालांकि तकनीक और माध्यम बदल गए हैं, लेकिन विश्वसनीय सूचना और पत्रकारिता के नैतिक मूल्य आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाचार पत्र की सबसे बड़ी संपत्ति जनता का विश्वास है और यह विश्वास सटीकता, निष्पक्षता, स्वतंत्रता तथा जवाबदेही के आधार पर अर्जित किया जाता है।
श्री राधाकृष्णन ने मीडिया से रचनात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को वैज्ञानिक उपलब्धियों, नवाचार, करुणा, सामुदायिक सेवा और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को भी प्रमुखता देनी चाहिए। इससे समाज को शिक्षित करने के साथ नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
उन्होंने विकास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक समस्याओं का समाधान व्यावहारिक उपायों के माध्यम से किया जाना चाहिए। हर मुद्दे का राजनीतिकरण करना या विकास का अंधाधुंध विरोध करना उचित नहीं है। नदियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनके स्वास्थ्य और गहराई को बनाए रखने के लिए समय पर उचित उपाय किए जाने की आवश्यकता बताई।
उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि केरल कौमुदी आगे भी सत्य, विश्वसनीयता और जनविश्वास को अपनी पत्रकारिता की आधारशिला बनाए रखेगा तथा मलयालम पत्रकारिता की एक सशक्त और जिम्मेदार आवाज के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने केरल कौमुदी उत्कृष्टता पुरस्कार भी प्रदान किए। कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, उच्च शिक्षा मंत्री श्री रोजी एम. जॉन, अलप्पुझा विधायक श्री एडी थॉमस, चथन्नूर विधायक श्री बीबी गोपकुमार, केरल कौमुदी के मुख्य संपादक श्री दीपू रवि, श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव श्री वेल्लापल्ली नटेसन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।