UPI MDR विवाद: 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4% शुल्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Wed 16-Sep-2026,09:48 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

UPI MDR विवाद: 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4% शुल्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती UPI MDR Charge Controversy
  • 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR प्रस्तावित है।

  • नए MDR नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है।

  • P2P भुगतान और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / UPI के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट भुगतान पर लागू किए जाने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दाखिल याचिका में वित्त मंत्रालय की 14 सितंबर 2026 की अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में इन प्रावधानों की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि संबंधित बदलाव पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के बिना किए गए।

15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR
NPCI की ओर से जारी नए ढांचे के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क का भुगतान मर्चेंट यानी भुगतान प्राप्त करने वाले कारोबारी करेंगे। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

इसका मतलब है कि 10,000 रुपये के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर 40 रुपये तक MDR बन सकता है, जबकि बड़े लेनदेन में निर्धारित अधिकतम सीमा लागू होगी। हालांकि, सभी प्रकार के UPI भुगतान इस शुल्क के दायरे में नहीं हैं।

आम ग्राहक के P2P भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क
नए नियमों के तहत Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा। इसी तरह 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। NPCI के अनुसार, 2,000 रुपये तक के छोटे P2M लेनदेन UPI के कुल P2M वॉल्यूम का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं।

इसलिए नए प्रावधान का सीधा दायरा मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन तक सीमित है। वित्त मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से सीधे वसूल किया जाने वाला सामान्य UPI शुल्क नहीं है।

छोटे कारोबारियों के लिए अलग प्रावधान
नए ढांचे में छोटे कारोबारियों को भी राहत देने के प्रावधान रखे गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, QR आधारित UPI भुगतान से हर महीने 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट इस MDR व्यवस्था से बाहर रहेंगे। वहीं कुछ विशेष श्रेणियों में अलग शुल्क संरचना लागू होगी। रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बीमा और कुछ अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े पात्र लेनदेन के लिए 5 रुपये का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

अब सुप्रीम कोर्ट में होगी नियमों की कानूनी जांच
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार, NPCI समेत संबंधित पक्षों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर के MDR फ्रेमवर्क को चुनौती देते हुए इनके लिए अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक आधार पर सवाल उठाए गए हैं।

फिलहाल 0.4 प्रतिशत MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने के लिए निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद इस व्यवस्था की वैधानिकता पर आगे न्यायिक प्रक्रिया होगी। इसलिए अंतिम स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और उसके आदेशों पर निर्भर करेगी।