मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु संस्थागत वित्तपोषण का विस्तार, किसानों को बड़ी राहत
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सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत वित्तपोषण को सरल बनाया, जिससे छोटे मत्स्य पालकों को आसान ऋण और आधुनिक तकनीक मिलेगी।
नई नीति के तहत तालाब निर्माण, जल प्रबंधन, फीड, कोल्ड स्टोरेज और फिश प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियों के लिए वित्त सहायता उपलब्ध होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित फाइनेंसिंग से मत्स्य उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
Delhi / मत्स्य पालन क्षेत्र में तेजी से बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने अब इस क्षेत्र में संस्थागत वित्तपोषण (Institutional Financing) को मजबूत करने पर जोर दिया है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति देने में मत्स्य पालन का योगदान लगातार बढ़ रहा है, और देश के लाखों मत्स्य पालक किसान वित्तीय सहायता और आधुनिक तकनीक की अपेक्षा कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नए दिशानिर्देश और योजनाओं की घोषणा की गई है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अब मत्स्य पालन के लिए बैंक ऋण, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों और सहकारी समितियों के माध्यम से निवेश की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत तालाब निर्माण, जल प्रबंधन, फीड, रोग नियंत्रण, कोल्ड स्टोरेज, मत्स्य परिवहन और आधुनिक मछली उत्पादन तकनीकों के लिए वित्त उपलब्ध होगा। यह पहल छोटे और संसाधन–विहीन मत्स्य पालकों के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकती है।
राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने बताया कि संरचित फाइनेंसिंग से न केवल मछली उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि ग्रामीण रोजगार, निर्यात और राज्य की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पिछले कुछ वर्षों में देश में मछली उत्पादन में तेज उछाल देखने को मिला है, लेकिन अभी भी व्यापक स्तर पर निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सहयोग की कमी महसूस की जाती है। नई नीति इस कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाएगी।
मत्स्य पालन विशेषज्ञों का कहना है कि संस्थागत वित्तपोषण के विस्तार से मत्स्य पालन क्षेत्र में 8–12% तक सालाना वृद्धि संभव है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि देश में समुद्री और ताजे पानी की मछली का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने हेतु और योजनाएँ लाई जाएंगी। इसके तहत आधुनिक मत्स्य बंदरगाहों का निर्माण, फिश प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना और डिजिटल मत्स्य प्लेटफॉर्म को विकसित किया जाएगा। यह कदम पूरे मत्स्य क्षेत्र को एक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम उद्योग में परिवर्तित करने में मदद करेगा।