छत्तीसगढ़ में 368 महतारी सदन मंजूर

Thu 19-Feb-2026,05:55 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ में 368 महतारी सदन मंजूर Mahatari-Sadan-Chhattisgarh-Rural-Women-Empowerment
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने 368 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये मंजूर कर ग्राम पंचायतों को सीधी क्रियान्वयन जिम्मेदारी दी।

  • महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास, स्व-सहायता समूह गतिविधियों और सामाजिक सशक्तिकरण का केंद्र बनेंगे।

Chhattisgarh / :

Raipur/ छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ‘महतारी सदन’ निर्माण को लेकर नई मार्गदर्शिका जारी की है, जिसके तहत अब ग्राम पंचायतों को ही निर्माण और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को गांव स्तर पर सुरक्षित, संसाधनयुक्त और स्थायी मंच उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मनिर्भरता की दिशा में संगठित रूप से आगे बढ़ सकें।

राज्य सरकार ने 368 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक महतारी सदन पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन भवनों का निर्माण ग्राम पंचायतों की निगरानी में होगा, जिससे योजना का लाभ सीधे ग्रामीण स्तर तक पहुंचे और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

विभागीय जानकारी के मुताबिक अब तक 137 महतारी सदनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी स्वीकृत भवनों का निर्माण 6 से 8 माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। निर्माण कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा प्रदान की जाएगी।

नई गाइडलाइन के तहत ग्राम पंचायतों को क्रियान्वयन एजेंसी बनाए जाने से स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और निगरानी मजबूत होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित होगी।

महतारी सदनों का उपयोग महिलाओं की बैठकों, स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों, कौशल विकास प्रशिक्षण, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों और अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए किया जाएगा। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को संगठित होने, नेतृत्व विकसित करने और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा।