ONGC का बड़ा कदम: एकलव्य विद्यालयों के विकास हेतु एनएसटीएफडीसी से एमओयू
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ओएनजीसी ने एनएसटीएफडीसी के साथ एमओयू कर एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा और अवसंरचना विकास को बढ़ावा दिया।
11 राज्यों में 144 आदिवासी संस्थानों के लिए 28 करोड़ रुपये की सीएसआर परियोजना से 35 हजार से अधिक छात्रों को लाभ।
दिल्ली/ देश में जनजातीय शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम पहल के तहत, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) ने 05 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के अंतर्गत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के अवसंरचना विकास, डिजिटल शिक्षा और आदिवासी छात्रों के सर्वांगीण विकास को लक्ष्य बनाकर किया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन महारत्न कंपनी ओएनजीसी ने जनजातीय युवाओं के शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के स्वायत्त निकाय एनएसटीएफडीसी के साथ हुए इस समझौते का उद्देश्य देशभर में संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में आधुनिक अवसंरचना का विकास करना और वहां अध्ययनरत आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल कौशल, भविष्य उन्मुख करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित ईएमआरएस योजना देश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करने की एक प्रमुख केंद्रीय योजना है। वर्तमान में देशभर में 499 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जो आदिवासी छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और सामाजिक रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह समझौता 5 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में संपन्न हुआ। दस्तावेजों पर एनएसटीएफडीसी की उप महाप्रबंधक श्रीमती बिस्मिता दास और ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख डॉ. देबासिस मुखर्जी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा, अपर सचिव श्री मनीष ठाकुर, संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडे, एनएसटीएफडीसी के अध्यक्ष सह-प्रबंध निदेशक श्री टी. रौमुआनपाइते, ओएनजीसी के मानव संसाधन निदेशक श्री मनीष पाटिल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
श्रीमती रंजना चोपड़ा ने कहा कि शिक्षा को सुदृढ़ कर हम स्थायी विकास के बीज बोते हैं और एक सशक्त, आत्मनिर्भर समाज की नींव रखते हैं। उन्होंने इस पहल को जनजातीय समुदायों के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सीएसआर के तहत ओएनजीसी ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 144 आदिवासी शिक्षा संस्थानों के लिए लगभग 28 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस राशि से डिजिटल शिक्षण अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा, छात्राओं के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सुविधाएं जैसे सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और भस्मक लगाए जाएंगे, शिक्षकों के क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएंगे तथा विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग और उद्यमिता प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से 35 हजार से अधिक आदिवासी विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह सहयोग जनजातीय कार्य मंत्रालय और कॉर्पोरेट क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का उदाहरण है, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगा।