इंडिया एआई इम्पैक्ट रिपोर्ट 2026: 110 स्टार्टअप्स का खुलासा
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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 110 स्टार्टअप की रिपोर्ट जारी, स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा क्षेत्र में एआई आधारित समाधानों पर विशेष जोर।
मेड-इन-इंडिया फाउंडेशन मॉडल और स्थानीय भाषा एआई इंटरफेस से भारत एआई निर्यात हब बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर।
New Delhi/ नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के दौरान जारी ‘इंडियाज एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप्स’ रिपोर्ट ने देश के तेजी से उभरते कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकोसिस्टम की व्यापक तस्वीर पेश की है। इस रिपोर्ट में 110 स्टार्टअप और गैर-लाभकारी संगठनों को शामिल किया गया है, जो सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए एआई आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और जलवायु जैसे क्षेत्रों में इन स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी भारत को एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र बना रही है।
रिपोर्ट को IndiaAI और Kalpa Impact द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया गया है। इसमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय समावेशन, शहरी आवागमन और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग को विस्तार से दर्शाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय भाषा आधारित एआई इंटरफेस वंचित और ग्रामीण समुदायों तक पहुंच बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मेड-इन-इंडिया फाउंडेशन मॉडल पर आधारित तकनीकों में निवेश बढ़ रहा है, जिससे देश आत्मनिर्भर एआई समाधानों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, एनआईसी के महानिदेशक और IndiaAI मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा कि यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, उद्योग और निवेशकों के लिए एक व्यावहारिक संसाधन है। इससे डिजिटल सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एकीकरण योग्य तकनीकों की पहचान आसान होगी।
IndiaAI मिशन के आईएएस अधिकारी मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला के. ने बताया कि भारतीय एआई स्टार्टअप अब पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर प्रभाव डालने वाले समाधान विकसित कर रहे हैं। लाखों लोगों को सेवाएं प्रदान करने की दिशा में यह परिवर्तन एआई इकोसिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के महाप्रबंधक (स्टार्टअप) अंशुल सिंघल ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप न्यायिक कार्यवाही की प्रतिलिपि, ग्रामीण स्वास्थ्य जांच और छोटे किसानों को सलाह देने जैसे विविध क्षेत्रों में समाधान दे रहे हैं। ये स्टार्टअप केवल एप्लिकेशन ही नहीं, बल्कि समावेशी डिजिटल अवसंरचना भी तैयार कर रहे हैं।
Kalpa Impact के संस्थापक और सीईओ सुशांत कुमार के अनुसार, भारत का एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम ‘सुपर-यूटिलिटी’ मॉडल पर काम कर रहा है, जहां तकनीक को वास्तविक मानवीय आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। कई कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर चुकी हैं, जिससे भारत एआई निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है।
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि एज एआई, ऑफलाइन समाधान और स्थानीय भाषाओं में वॉइस बॉट जैसी तकनीकें भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित की जा रही हैं, जो ग्लोबल साउथ के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बन सकती हैं।