मोहन भागवत ने अपने संबोधन में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के संगठन के लिए समर्पित कर दिया। उनके अनुसार, डॉ. हेडगेवार का जीवन त्याग, अनुशासन और अखंड राष्ट्रभाव का प्रतीक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों की प्रेरक कहानियां नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
भागवत ने बताया कि फिल्म ‘शतक’ में डॉ. हेडगेवार के जीवन के कई प्रेरक प्रसंगों को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है। खास तौर पर फिल्म के एक गीत में उनके बाल्यकाल की एक मार्मिक घटना को दिखाया गया है, जिसने उनके व्यक्तित्व और संकल्प को मजबूत दिशा दी। यह प्रसंग दर्शकों को उनके जीवन की जड़ों और विचारों से जोड़ने का प्रयास करता है।
उन्होंने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्माताओं और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। उनके अनुसार, सिनेमा एक प्रभावशाली माध्यम है, जिसके जरिए इतिहास और विचारधारा को व्यापक समाज तक पहुंचाया जा सकता है।
फिल्म ‘शतक’ संघ की सौ वर्षों की यात्रा को समर्पित है और इसे 20 फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा। इस फिल्म के माध्यम से संगठन के इतिहास, विचार और योगदान को नए सिरे से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।
फिल्म को लेकर समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि यह फिल्म न केवल संघ के कार्यकर्ताओं के लिए, बल्कि आम दर्शकों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इस ऐतिहासिक और वैचारिक प्रस्तुति को किस रूप में स्वीकार करते हैं।