राह-वीर: बिना डर के जीवन बचाने की भारत सरकार की पहल

Sun 04-Jan-2026,11:52 PM IST +05:30

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राह-वीर: बिना डर के जीवन बचाने की भारत सरकार की पहल बिना डर के जीवन बचाने की भारत सरकार की पहल
  • राह-वीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले नागरिकों को कानूनी सुरक्षा और गुमनामी का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

  • गोल्डन आवर में त्वरित सहायता से मौत और स्थायी विकलांगता के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

  • भारत सरकार राह-वीरों को 25,000 रुपये का पुरस्कार देकर सामाजिक जिम्मेदारी की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली/ 04 जनवरी, भारत में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान पहले एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, जो किसी घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे निर्णायक समय होता है। इसी अहम समय में नागरिकों को बिना डर के आगे आकर मदद के लिए प्रेरित करने हेतु भारत सरकार ने ‘राह-वीर’ यानी गुड समैरिटन नीति को प्रभावी रूप से लागू किया है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत अधिसूचित यह व्यवस्था नेक नीयत से सहायता करने वाले नागरिकों को कानूनी सुरक्षा, सम्मान और प्रोत्साहन प्रदान करती है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में लागू किए गए गुड समैरिटन नियमों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित की मदद करने से कानूनी उलझनों, पुलिस पूछताछ या अस्पताल की औपचारिकताओं के डर से पीछे न हटे। ऐसे नागरिक जो बिना किसी निजी स्वार्थ के घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाते हैं, उन्हें ‘राह-वीर’ कहा जाता है।

गोल्डन आवर के दौरान त्वरित सहायता से न केवल मृत्यु दर को कम किया जा सकता है, बल्कि गंभीर स्थायी विकलांगता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जटिलताओं से भी बचाव संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में दुर्घटना के बाद मौत का कारण चोट नहीं बल्कि समय पर इलाज न मिल पाना होता है। राह-वीर नीति इसी अंतर को पाटने का कार्य करती है।

इस नीति के तहत, किसी दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी में नहीं डाला जा सकता। उन्हें न तो अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया जा सकता है और न ही पुलिस हिरासत में लिया जा सकता है। यदि वह चाहें तो पूरी तरह गुमनाम रह सकते हैं। अस्पतालों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे राह-वीरों से इलाज का खर्च न मांगें और प्राथमिक उपचार में किसी प्रकार की देरी न करें।

महत्वपूर्ण बात यह है कि राह-वीर बनने के लिए किसी प्रकार के चिकित्सकीय प्रशिक्षण या विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। केवल मानवता, संवेदनशीलता और समय पर निर्णय लेने की इच्छा ही सबसे बड़ा योगदान बन जाती है। सरकार का मानना है कि यदि हर नागरिक थोड़ी जिम्मेदारी निभाए, तो हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

भारत में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए यह पहल और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश को हर साल सकल घरेलू उत्पाद का लगभग तीन प्रतिशत तक आर्थिक नुकसान होता है। यह केवल आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय त्रासदी भी है।

इसी पृष्ठभूमि में ‘राह-वीर’ योजना के तहत सहायता करने वाले नागरिकों को न केवल कानूनी सुरक्षा दी जाती है, बल्कि उन्हें सम्मान और वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है, तो उसे 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र दिया जाता है। एक व्यक्ति वर्ष में अधिकतम पांच बार इस सम्मान का पात्र हो सकता है।

सरकार का उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं, बल्कि समाज में एक ऐसी संस्कृति विकसित करना है जहां सड़क पर किसी की मदद करना डर नहीं, बल्कि गर्व की बात हो। राह-वीर योजना नागरिकों को यह विश्वास दिलाती है कि मानवता का साथ देने पर राज्य भी उनके साथ खड़ा है।

राह-वीर कोई सामान्य योजना नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और संवेदनशील नागरिकता का प्रतीक है। यह संदेश देती है कि किसी की जान बचाने के लिए डॉक्टर होना जरूरी नहीं, बल्कि इंसान होना ही काफी है। अगली बार जब कोई सड़क दुर्घटना आपके सामने हो, तो याद रखें आप ही किसी के जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे बड़ी उम्मीद हो सकते हैं।