Trump Putin Phone Call | ईरान जंग पर ट्रंप-पुतिन की लंबी बातचीत, पुतिन ने रखा युद्ध खत्म करने का प्लान
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Trump Putin Phone Call
ईरान युद्ध पर ट्रंप और पुतिन के बीच एक घंटे की अहम बातचीत।
पुतिन ने कूटनीतिक तरीके से युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव रखा।
यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तेल बाजार पर भी चर्चा।
America / मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर लंबी और अहम बातचीत हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने लगभग एक घंटे तक चर्चा की, जिसमें ईरान-इजरायल संघर्ष के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तेल बाजार की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया।
रूस के राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, यह बातचीत दिसंबर के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली सीधी बातचीत थी। उशाकोव ने कहा कि इस बातचीत की पहल वॉशिंगटन की ओर से की गई थी और दोनों देशों के लिए यह चर्चा काफी महत्वपूर्ण और उपयोगी साबित हो सकती है।
पुतिन ने साझा किया युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव
बातचीत के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए एक संभावित योजना ट्रंप के साथ साझा की। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का समाधान सैन्य टकराव से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक रास्ते से निकलना चाहिए।
पुतिन ने इस संदर्भ में खाड़ी देशों के नेताओं, ईरान के राष्ट्रपति और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ अपने संपर्कों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।
रूस लंबे समय से ईरान का एक प्रमुख सहयोगी माना जाता है, इसलिए पुतिन की यह पहल क्षेत्रीय तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
ट्रंप ने पेश किया अमेरिका-इजरायल का दृष्टिकोण
फोन कॉल के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों से जुड़े घटनाक्रमों पर अपना आकलन साझा किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका क्षेत्र की सुरक्षा और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
उशाकोव के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच विचारों का बेहद महत्वपूर्ण और उपयोगी आदान-प्रदान हुआ। यह बातचीत केवल वर्तमान संघर्ष तक सीमित नहीं थी, बल्कि इससे भविष्य की कूटनीतिक संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
यूक्रेन युद्ध पर भी हुई चर्चा
ईरान के मुद्दे के अलावा ट्रंप और पुतिन के बीच यूक्रेन में जारी युद्ध पर भी विस्तार से बातचीत हुई। उशाकोव के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि यूक्रेन संघर्ष का जल्द से जल्द अंत होना अमेरिका के हित में है। इसके लिए युद्धविराम और दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
इस दौरान पुतिन ने ट्रंप को यूक्रेन में मौजूदा हालात की जानकारी दी और बताया कि संपर्क रेखा यानी फ्रंटलाइन पर रूसी सैनिक लगातार बढ़त बना रहे हैं। रूस का मानना है कि मौजूदा सैन्य स्थिति यूक्रेन की सरकार को बातचीत के लिए प्रेरित कर सकती है।
ट्रंप की मध्यस्थता की कोशिशों की सराहना
उशाकोव ने यह भी बताया कि पुतिन ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए ट्रंप द्वारा किए गए मध्यस्थता के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक शक्तियां मिलकर कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम करें तो इस संघर्ष का शांतिपूर्ण अंत संभव है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि लंबे समय तक चलने वाले युद्धों से वैश्विक स्थिरता और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होती हैं।
वैश्विक तेल बाजार और वेनेजुएला पर चर्चा
फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिति पर भी चर्चा की। खास तौर पर वेनेजुएला की स्थिति और तेल आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई पर संभावित असर को देखते हुए यह चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-इजरायल संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अलास्का शिखर सम्मेलन के बाद पहली बड़ी बातचीत
बताया जा रहा है कि ट्रंप और पुतिन के बीच पिछली बार पिछले साल अगस्त में अलास्का में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान आमने-सामने मुलाकात हुई थी। उसके बाद से दोनों नेताओं के बीच इस स्तर की यह पहली बड़ी बातचीत मानी जा रही है।
उशाकोव के अनुसार, यह बातचीत गंभीर और रचनात्मक माहौल में हुई। दोनों नेताओं ने वैश्विक संकटों को कम करने और संभावित समाधान तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और रूस जैसे बड़े देश मिलकर कूटनीतिक प्रयास करें, तो ईरान-इजरायल संघर्ष और यूक्रेन युद्ध जैसे जटिल मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बातचीत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या नई पहल सामने आती है।