उज्जैन महाकाल मंदिर से स्वाभिमान पर्व 2026 की शुरुआत
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Hemant-Khandelwal-Mahakal-Swabhiman-Parv-2026
सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1000 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में जनसहभागिता से पूजा, आरती और ओंकार जप आयोजित होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुआ स्वाभिमान पर्व सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र गौरव को मजबूत करेगा।
Ujjain/ बाबा महाकाल के दर्शन के लिए प्रतिदिन देशभर से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल आज उज्जैन पहुंचे और श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रातःकालीन भस्मारती (दद्योदक आरती) में सहभागिता कर बाबा महाकाल का विधिवत पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और आत्मनिर्भर भारत की कामना की।
हेमंत खंडेलवाल सुबह लगभग 7:45 बजे महाकाल मंदिर परिसर पहुंचे। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल का ध्यान और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया। पूजन के दौरान उनके साथ विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, भाजपा शहर अध्यक्ष संजय अग्रवाल और मुकेश यादव भी उपस्थित रहे। नंदी हॉल में जाप के पश्चात खंडेलवाल ने देहरी से पुष्प, दूध और जल अर्पित किया, जिसे मंदिर के पुजारियों द्वारा बाबा महाकाल को समर्पित किया गया।
इस अवसर पर हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर वर्ष 2026 को “स्वाभिमान पर्व” के रूप में मनाया जाएगा। यह पर्व सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने के स्मरण में आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत देशभर के प्रमुख शिवालयों और मंदिरों में जनसहभागिता के साथ पूजा-अर्चना, आरती और ओंकार जप का आयोजन किया जा रहा है।
खंडेलवाल ने कहा कि इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत उज्जैन के महाकाल मंदिर से की गई है, जो आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने बताया कि आज महाकाल के चरणों में पूजा कर ‘ॐ नमः शिवाय’ का सामूहिक जाप किया गया और राष्ट्र की उन्नति के लिए आशीर्वाद मांगा गया।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी दिनों में सोमनाथ मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर एक विशेष अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य देशवासियों में सांस्कृतिक स्वाभिमान, राष्ट्रीय चेतना और आध्यात्मिक एकता को मजबूत करना है।
महाकाल मंदिर में हुए इस आयोजन को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना से जोड़कर देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।