DU दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने बांटी 1.2 लाख उपाधियां
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दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने 1.2 लाख से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं।
विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
नई दिल्ली/ सी. पी. राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर 1.2 लाख से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक यात्रा, शैक्षणिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने स्नातकों से आह्वान किया कि वे “राष्ट्र प्रथम” की भावना को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाएं।
उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत मात्र तीन कॉलेज, दो संकाय, आठ विभाग और 750 विद्यार्थियों से हुई थी। आज विश्वविद्यालय 16 संकायों, 86 विभागों, 90 कॉलेजों, 20 छात्रावासों, 30 से अधिक केंद्रों और संस्थानों तथा 34 पुस्तकालयों के साथ छह लाख से अधिक विद्यार्थियों का शैक्षणिक केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह विस्तार संस्थान की निरंतर प्रगति और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
समारोह की भव्यता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या कई देशों की कुल जनसंख्या से अधिक है, जो विश्वविद्यालय के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है। उन्होंने इसे भारत के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताते हुए कहा कि यहां से निकले पूर्व छात्रों ने देश के बौद्धिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक जीवन को दिशा दी है।
विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि संस्थान ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में लगातार चार वर्षों तक भारतीय विश्वविद्यालयों में शीर्ष स्थान बनाए रखा है। उन्होंने इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध संस्कृति का परिणाम बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि स्नातक ऐसे समय में समाज में प्रवेश कर रहे हैं जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक राजनीतिक बदलाव जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में उपाधि केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा की प्रतिबद्धता है।
विकसित भारत @2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ नवाचार, अनुसंधान और स्वदेशी समाधान विकसित करने की क्षमता है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष उपाधि प्राप्त करने वालों में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। इसे उन्होंने महिला शिक्षा में ऐतिहासिक प्रगति का प्रमाण बताया।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा बनाए रखने, नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का रचनात्मक उपयोग करने का आग्रह किया। समारोह में कुलपति प्रो. योगेश सिंह, संकाय सदस्य और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।