US Senate Rejects Iran War Resolution: ट्रंप को मिली बड़ी जीत, सैन्य कार्रवाई जारी
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Donald Trump Decision
ईरान युद्ध पर अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव खारिज.
ट्रंप प्रशासन को सैन्य कार्रवाई जारी रखने की छूट.
डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं के बीच तीखी बहस.
America / मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का सैन्य अभियान लगातार जारी है। इसी बीच अमेरिका की राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में लाया गया प्रस्ताव सीनेट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, इस प्रस्ताव में कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के ईरान पर हमला करने का फैसला लिया, जो संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है। लेकिन सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति के फैसले का जोरदार समर्थन किया और प्रस्ताव को गिरा दिया। इससे ट्रंप प्रशासन को फिलहाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की खुली छूट मिल गई है।
द्विदलीय प्रस्ताव क्यों लाया गया?
यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर टिम केन और रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने मिलकर पेश किया था। इसे एक द्विदलीय प्रस्ताव माना जा रहा था क्योंकि इसमें दोनों पार्टियों के नेताओं की भागीदारी थी।
प्रस्ताव में मांग की गई थी कि जब तक अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस स्पष्ट रूप से अनुमति न दे, तब तक अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की शत्रुतापूर्ण सैन्य गतिविधि से वापस बुला लिया जाए।
हालांकि 100 सदस्यों वाली सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत है। वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन किया और प्रस्ताव उसी अंतर से गिर गया।
युद्ध के बीच हुई अहम वोटिंग
यह वोटिंग ऐसे समय में हुई जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को पांच दिन से ज्यादा हो चुके हैं और संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जंग में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और तेहरान के कई वरिष्ठ अधिकारी अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे जा चुके हैं।
वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। इस संघर्ष का असर अब दुबई और सऊदी अरब की राजधानी रियाद जैसे शहरों तक भी पहुंच चुका है।
मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात को देखते हुए कई देश अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी की आपत्ति
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस को दरकिनार कर सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया है। उनके अनुसार यह कदम अमेरिकी संविधान की भावना के खिलाफ है।
सीनेटर टिम केन ने एक ब्रीफिंग के बाद कहा कि सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि अमेरिका को ईरान से तत्काल कोई बड़ा खतरा था।
डेमोक्रेट नेताओं का मानना है कि इतने बड़े सैन्य फैसले के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी थी, लेकिन प्रशासन ने सीधे एयर स्ट्राइक का आदेश देकर इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया।
ट्रंप समर्थकों का बचाव
दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक और रिपब्लिकन नेता इस कार्रवाई को जरूरी बता रहे हैं।
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रंप के फैसले का बचाव करते हुए लिखा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ धमकी देता रहा है।
उन्होंने कहा कि जब ईरान “अमेरिका की मौत” जैसे नारे लगाता है तो उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। ग्राहम के अनुसार यह कार्रवाई इसलिए जरूरी थी ताकि ईरान को और मिसाइलें बनाने से रोका जा सके।
क्या है वॉर पावर्स एक्ट?
जिस प्रस्ताव के आधार पर यह बहस हुई, वह 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के तहत लाया गया था। यह कानून वियतनाम युद्ध के बाद बनाया गया था ताकि राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर कुछ हद तक नियंत्रण रखा जा सके।
इस कानून के अनुसार यदि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के किसी सैन्य अभियान की शुरुआत करते हैं, तो कांग्रेस को उस पर मतदान कराने का अधिकार होता है। साथ ही बिना अनुमति के चलने वाले सैन्य अभियान को आमतौर पर 60 दिनों तक सीमित रखा जाता है।
फिलहाल सीनेट द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने में राजनीतिक मजबूती मिल गई है। हालांकि अमेरिका के भीतर इस युद्ध को लेकर बहस अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।