3 मार्च 2026 पूर्ण चंद्र ग्रहण: समय, सूतक और कहां दिखेगा

Tue 03-Mar-2026,12:24 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

3 मार्च 2026 पूर्ण चंद्र ग्रहण: समय, सूतक और कहां दिखेगा March-3-2026-Total-Lunar-Eclipse-Timing
  • सूतक काल सुबह 6:40 बजे से शुरू, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्य और पूजा-पाठ वर्जित माने जाते हैं।

  • भारत सहित एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई हिस्सों में दिखाई देगा पूर्ण चंद्र ग्रहण।

Delhi / Delhi :

Delhi/ पूरी तरह प्रवेश कर जाएगा। इस दौरान चंद्रमा का रंग तांबे या हल्की लालिमा लिए दिखाई दे सकता है, जिसे सामान्य रूप से ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। खगोलीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होकर अपनी छाया चंद्रमा पर डालती है। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाता है, तब उसे पूर्ण या खग्रास चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

इस ग्रहण का स्पर्श काल दोपहर 3:20 बजे होगा और ग्रहण शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है, जो सुबह 6:40 बजे से प्रभावी रहेगा। सूतक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ ग्रहण समाप्ति के बाद ही किए जाते हैं।

धार्मिक परंपराओं में ग्रहण को संवेदनशील समय माना गया है। खासकर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी आस्था के आधार पर लोग नियमों का पालन करते हैं।

ग्रहण के दौरान अनावश्यक कार्यों से बचने, रसोई संबंधी काम न करने, सुई-धागा या सिलाई-कढ़ाई से परहेज करने और पूजास्थल की मूर्तियों को स्पर्श न करने की परंपरागत सलाह दी जाती है। साथ ही दीपक न जलाने और खुले आसमान में सीधे ग्रहण न देखने की भी बात कही जाती है।

वहीं, इस दौरान शांत वातावरण में ईश्वर का स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान करने की सलाह दी जाती है। चंद्र देव का मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का जाप भी किया जा सकता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर स्वच्छता का ध्यान रखने की परंपरा है।

यह पूर्ण चंद्र ग्रहण पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर क्षेत्र में देखा जा सकेगा। इसके अलावा पेरू, कनाडा, अमेरिका, ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया, हांगकांग, थाईलैंड, क्यूबा, चीन, कोरिया, जापान और भारत के पूर्वी हिस्सों में यह पूर्ण रूप से दिखाई देगा। अन्य क्षेत्रों में इसका आंशिक प्रभाव नजर आ सकता है।