डबरा स्टेशन पर रेलवे की तत्परता से गर्भवती महिला और नवजात की जान बची
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मंगला एक्सप्रेस में अचानक प्रसव पीड़ा के बाद ट्रेन स्टाफ और कंट्रोल रूम ने तेजी से समन्वय दिखाया।
समय पर अस्पताल पहुंचने से जटिल स्थिति के बावजूद सुरक्षित प्रसव संभव हुआ, रेलवे की मानवीय छवि मजबूत हुई।
Madhya Pradesh/ कभी-कभी कुछ मिनटों का सही और संवेदनशील निर्णय किसी परिवार के लिए जीवनभर की खुशी बन जाता है। ऐसा ही एक मानवीय और प्रेरणादायक उदाहरण बुधवार को मध्य प्रदेश के डबरा रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहां भारतीय रेलवे और रेल सुरक्षा बल (RPF) की सतर्कता ने एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की जान बचा ली।
घटना गाड़ी संख्या 12617 मंगला एक्सप्रेस की है, जो कल्याण से ग्वालियर की ओर जा रही थी। ट्रेन के जनरल कोच में यात्रा कर रही गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ती देख ट्रेन स्टाफ ने बिना देरी किए वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही झांसी स्थित डिप्टी कंट्रोलर ने डबरा स्टेशन मास्टर को अलर्ट किया और ट्रेन को सुरक्षित रूप से मेन लाइन पर रुकवाने के निर्देश दिए गए।
स्टेशन पर सार्वजनिक घोषणा के माध्यम से रेल सुरक्षा बल को तुरंत सूचित किया गया। आरपीएफ के सहायक उप निरीक्षक गिरिजेश कुमार, प्रधान आरक्षक दीपक कुमार, आरक्षक धर्मवीर सिंह और महिला आरक्षक नीतू रावत ने तत्काल मौके पर पहुंचकर महिला यात्री को सुरक्षित ट्रेन से उतारा। समय की गंभीरता को समझते हुए एंबुलेंस का इंतजार न कर, निजी संसाधनों से महिला को सिविल अस्पताल डबरा पहुंचाया गया।
अस्पताल में डॉक्टर स्वाति अग्रवाल और नर्सिंग स्टाफ अर्चना ने तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार नवजात के गले में नाल फंसी हुई थी, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान को गंभीर खतरा था। समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण सुबह 10 बजकर 56 मिनट पर महिला ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। फिलहाल मां और नवजात दोनों सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
महिला यात्री मंजेश, जिला भिंड के ग्राम रामनगर की निवासी हैं और अपने पति पवन विश्वकर्मा के साथ यात्रा कर रही थीं, जिनके पैर में पहले से प्लास्टर लगा हुआ था। इस मानवीय सहयोग ने परिवार को बड़ी राहत दी। यह घटना न केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन है, बल्कि भारतीय रेलवे की संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मानवता का जीवंत उदाहरण भी है।