संत गाडगे महाराज की जयंती संगोष्ठी का दूसरा सत्र संपन्न, सामाजिक चेतना और संगठन की भूमिका पर हुई चर्चा
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Prayagraj Seminar
संत गाडगे महाराज की जयंती पर संगोष्ठी का दूसरा सत्र.
सामाजिक आंदोलन और संगठन की भूमिका पर चर्चा.
स्वच्छता, शिक्षा और सेवा के संदेश पर जोर.
Prayagraj / संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा सत्र विचारोत्तेजक विमर्श और सामाजिक प्रतिबद्धता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (WORDD) द्वारा किया गया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता CISF के सेवानिवृत्त सीनियर कमांडेंट एम. के. वर्मा ने की। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राम करन निर्मल, प्रदेश अध्यक्ष, लोहिया वाहिनी, संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दिवाकर एवं ममता दिवाकर उपस्थित रहे। सत्र का संचालन डॉ. संदीप दिवाकर ने किया।
दूसरे सत्र में वक्ता सुरेन्द्र चौधरी, विनोद भास्कर एवं धर्मेंद्र दिवाकर ने संत गाडगे महाराज के व्यक्तित्व, संघर्ष और सामाजिक आंदोलन पर विस्तार से अपने विचार रखे। वक्ता धर्मेंद्र दिवाकर ने कहा कि संत गाडगे बाबा 20वीं सदी के सामाजिक आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महान संत थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया। उनकी महानता इस बात में थी कि समाज सुधार के लिए वे स्वयं को भी जिम्मेदार मानने से पीछे नहीं हटते थे। उनका जीवन त्याग, सेवा और आत्मचिंतन का अद्भुत उदाहरण है, जिससे आज भी समाज को दिशा मिलती है।
अगले वक्ता के रूप में विनोद भास्कर, सचिव WORDD संस्था, ने संस्था के इतिहास और सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्था की शुरुआत मात्र दस लोगों के छोटे समूह से हुई थी, लेकिन आज यह एक सशक्त सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित हो चुकी है। विशेष रूप से कोविड काल में संस्था ने बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की सहायता कर समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि संत गाडगे महाराज के आदर्शों से प्रेरित होकर संस्था निरंतर सामाजिक सेवा के कार्यों में जुटी हुई है। संत गाडगे महाराज का जीवन आज भी समाज के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, वह वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। मंचासीन अतिथियों ने भी संत गाडगे महाराज के संघर्षों, उनके दर्शन और सामाजिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान संत गाडगे महाराज के जीवन पर आधारित गीतों की प्रस्तुति भी की गई, जिससे पूरा वातावरण प्रेरणादायक बन गया। उपस्थित जनसमूह ने संत गाडगे महाराज के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। संगोष्ठी के दोनों सत्रों में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि हम स्वच्छता, शिक्षा और समाज सेवा के उनके संदेश को व्यवहार में उतारें, तभी उनकी 150वीं जयंती मनाना सार्थक होगा।