शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO केस, कोर्ट आदेश के बाद FIR, आरोपों को बताया साजिश

Sun 22-Feb-2026,02:11 PM IST +05:30

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO केस, कोर्ट आदेश के बाद FIR, आरोपों को बताया साजिश Swami Avimukteshwaranand Jyotishpeeth Case
  • कोर्ट आदेश पर POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज.

  • एक नाबालिग सहित दो शिष्यों के शोषण का आरोप.

  • स्वामी ने आरोपों को साजिश बताया, निष्पक्ष जांच की मांग.

Uttar Pradesh / Prayagraj (Allahabad) :

Prayagraj / ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों में झूसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई इलाहाबाद कोर्ट के आदेश के बाद की गई। मामले में पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर के अनुसार, कथित घटनाएं 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की बताई गई हैं। शिकायत में दो शिष्यों के शोषण का आरोप है, जिनमें एक नाबालिग बताया गया है।

कुंभ और माघ मेला शिविरों का जिक्र
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के अनुसार, पीड़ित शिष्य लंबे समय से शोषण का सामना कर रहे थे, लेकिन डर और दबाव के कारण सामने नहीं आ पा रहे थे। एफआईआर में दावा किया गया है कि 2025 के कुंभ मेला और 2026 के माघ मेला के दौरान लगे शिविरों में भी कथित घटनाएं हुईं। आरोप यह भी है कि शिविर के भीतर ही नहीं, बल्कि स्वामी के कैंप के बाहर खड़ी गाड़ी में भी शोषण किया गया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धाराएं 51, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही, दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

स्वामी का बयान: “आरोप और साजिश”
वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि आरोप लगाना अलग बात है और उसे साबित करना अलग। “अगर हम दोषी होते तो चिंता करते, लेकिन जब हम निर्दोष हैं तो हमें किसी बात का भय नहीं,” उन्होंने कहा।

स्वामी ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि अंतिम भरोसा न्यायालय पर है और अदालत में सच्चाई सामने आएगी।

शिकायतकर्ता पर भी लगाए आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि आशुतोष ने कोर्ट में दो अलग-अलग शपथ पत्र दिए हैं, जिनमें अलग-अलग बातें कही गई हैं। उन्होंने दावा किया कि जब एक ही व्यक्ति अलग-अलग बयान देता है, तो उनमें से एक झूठा होना तय है।

स्वामी ने पूरे मामले को एक बड़ी साजिश बताते हुए कहा कि यह उन्हें बदनाम करने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आगामी यात्राओं और गौ रक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता कुछ लोगों को परेशान कर रही है, इसलिए इस तरह के केस बनाए जा रहे हैं।

फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अदालत में इस मामले का क्या रुख रहता है।