अमरावती में बनेगा भारत का पहला क्वांटम-एआई विश्वविद्यालय
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अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और एआई विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने हेतु एनआईईएलआईटी और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच ऐतिहासिक एमओयू।
डीप-टेक इनक्यूबेशन, उद्योग-संरेखित उत्कृष्टता केंद्र और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत की तकनीकी क्षमता होगी मजबूत।
Delhi/ भारत के डीप-टेक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक पहल के तहत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) और आंध्र प्रदेश सरकार ने अमरावती में देश का पहला समर्पित क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह एमओयू इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अधीन इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान किया गया। इस पहल को भारत की गहन प्रौद्योगिकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, एमईआईटीवाई के सचिव एस. कृष्णन, एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. एम.एम. त्रिपाठी और अमरावती क्वांटम वैली के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुए। इस अवसर पर कहा गया कि प्रस्तावित परिसर भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को नई दिशा देगा और राज्य के महत्वाकांक्षी क्वांटम मिशन को गति प्रदान करेगा।
अमरावती को क्वांटम वैली पहल के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय परिसर एनआईईएलआईटी के डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी ढांचे के अंतर्गत कार्य करेगा और पूरी तरह क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित होगा। इसे देश का पहला संस्थागत रूप से समर्पित क्वांटम-एआई शैक्षणिक केंद्र माना जा रहा है।
प्रस्तावित परिसर में क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम एल्गोरिदम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम संचार, साइबर सुरक्षा, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और एआई-क्वांटम अभिसरण अनुसंधान जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के साथ उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाएं और उद्योग-संरेखित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा, डीप-टेक इनक्यूबेशन और उद्यमिता सहायता के माध्यम से स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के साथ सहयोग की भी योजना है, जिससे भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को क्वांटम और एआई तकनीकों में अग्रणी बनाने में सहायक होगी। इससे न केवल तकनीकी शिक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि अगली पीढ़ी की प्रतिभाओं को उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तैयार किया जा सकेगा।