इंडिया एआई समिट 2026 में वॉइस टेक नीति व टूलकिट लॉन्च
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इंडिया एआई समिट 2026 में वॉइस टेक्नोलॉजी पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च, डिजिटल समावेशन को नई दिशा।
बहुभाषी भारत में स्पीच एआई के लिए डेटा पारदर्शिता, समावेशन और जिम्मेदार नवाचार पर केंद्रित नीति ढांचा प्रस्तावित।
New Delhi/ भारत में वॉइस टेक्नोलॉजी डिजिटल समावेशन की नई धुरी बनकर उभर रही है। सार्वजनिक सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच आसान बनाने में स्पीच-आधारित समाधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी दिशा में 20 फरवरी 2026 को इंडिया एआई समिट एक्सपो 2026 में वॉइस टेक्नोलॉजी पर एक व्यापक नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य भारत में खुली, समावेशी और जिम्मेदार स्पीच टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना है।
यह नीति रिपोर्ट आर्टपार्क @आईआईएससी, डिजिटल फ्यूचर्स लैब और ट्राइलीगल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। इसमें भाषिणी और ‘फेयर फॉरवर्ड – एआई फॉर ऑल’ पहल का सहयोग रहा। इस परियोजना को जीआईजेड ने लागू किया, जबकि जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (बीएमजेड) ने वित्तीय समर्थन प्रदान किया।
भारत जैसे बहुभाषी देश में वॉइस टेक्नोलॉजी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का अहम हिस्सा बनती जा रही है। स्पीच-आधारित एप्लिकेशन साक्षरता, भाषा और डिजिटल कौशल से जुड़ी बाधाओं को कम कर सकते हैं। हालांकि, डेटा संग्रह, मॉडल प्रशिक्षण, पारदर्शिता, प्रतिनिधित्व और दुरुपयोग की रोकथाम जैसे कई जटिल मुद्दे भी सामने आते हैं।
नीति रिपोर्ट में वॉइस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए सुझाव दिया गया है कि मूलभूत वाक्-डेटासेट को डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति के रूप में विकसित किया जाए। इसके साथ ही मॉडल की पारदर्शिता, समावेशिता और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने, सार्वजनिक अवसंरचना में निवेश बढ़ाने और जिम्मेदार नवाचार को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।
डेवलपर्स टूलकिट तकनीकी समुदाय के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा। यह डेटा असमानता, गुणवत्ता आश्वासन की कमी, सीमित मूल्यांकन प्रणाली और खंडित शासन ढांचे जैसी समस्याओं की पहचान करता है। टूलकिट विकास के पूरे जीवनचक्र—डेटा संग्रह से लेकर तैनाती और निगरानी तक—समावेशी और सुरक्षित स्पीच एआई सिस्टम बनाने के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
डिजिटल इंडिया, भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि भारत तेजी से आवाज-प्रधान डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है और इसके लिए मजबूत नीतिगत ढांचे और व्यावहारिक उपकरण आवश्यक हैं। वहीं बीएमजेड की महानिदेशक डॉ. एरियन हिल्डेब्रांड्ट ने इसे डिजिटल विभाजन कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत में बहुभाषी वॉइस एआई समाधानों को संस्थागत आधार प्रदान करेगी और सार्वजनिक सेवाओं, शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच को व्यापक बनाएगी।