ऊर्जा सुरक्षा पर कुमारस्वामी: भारत बनेगा स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र
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ऊर्जा सुरक्षा पर कुमारस्वामी
भारत को स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने पर जोर।
ग्रीन स्टील, बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सरकार का बढ़ावा।
आत्मनिर्भर भारत के तहत मजबूत औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की पहल।
New Delhi / केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में ऊर्जा सुरक्षा की परिभाषा अब केवल ऊर्जा संसाधनों तक सीमित नहीं रह गई है। आज किसी भी देश की वास्तविक शक्ति इस बात से तय होती है कि वह भविष्य की ऊर्जा तकनीकों के लिए उत्पादन, नवाचार और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) विकसित करने में कितना सक्षम है। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में आयोजित 7वें सीआईआई अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कही।
कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती वैश्विक मांग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत केवल स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का बड़ा उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनका अग्रणी निर्माता बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी, ट्रांसफॉर्मर, बिजली उपकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, भारी इंजीनियरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी तकनीकों के विकास के लिए मजबूत घरेलू विनिर्माण आधार आवश्यक है।
इस्पात क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि स्टील वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की रीढ़ बन चुका है। सौर पार्क, पवन टर्बाइन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी निर्माण संयंत्र, बंदरगाह और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं सभी उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात पर निर्भर हैं। उन्होंने 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि यह वृद्धि पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों के माध्यम से ही संभव होगी। उन्होंने ग्रीन स्टील को भविष्य की आर्थिक और पर्यावरणीय आवश्यकता बताया।
भारी उद्योग क्षेत्र पर बोलते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन तभी सफल होगा जब बैटरी, भारी विद्युत उपकरण, ऊर्जा भंडारण प्रणाली, निर्माण उपकरण और ऑटोमोबाइल विनिर्माण जैसी पूरी औद्योगिक मूल्य श्रृंखला देश में विकसित होगी। उन्होंने बताया कि 10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव योजना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जबकि 18,100 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना के तहत 50 गीगावॉट घरेलू बैटरी निर्माण क्षमता विकसित की जा रही है।
मंत्री ने दुर्लभ खनिजों और उन्नत सामग्रियों की उपलब्धता को भी ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने 7,280 करोड़ रुपये की सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और ऑटोमोबाइल, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा तथा एयरोस्पेस क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
अपने संबोधन के अंत में कुमारस्वामी ने उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और तकनीकी रूप से सक्षम विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।