गगनयान मिशन को नई रफ्तार: 2026 में पहला मानवरहित मिशन, 2027 तक अंतरिक्ष में जाएगा पहला भारतीय दल

Wed 05-Aug-2026,10:55 PM IST +05:30

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गगनयान मिशन को नई रफ्तार: 2026 में पहला मानवरहित मिशन, 2027 तक अंतरिक्ष में जाएगा पहला भारतीय दल Gaganyaan News
  • 2026 में पहला मानवरहित और 2027 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन प्रस्तावित।

  • मानव रेटेड लॉन्च व्हीकल और क्रू मॉड्यूल का विकास सफलतापूर्वक पूरा।

  • 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक अधिकांश तकनीकी विकास, परीक्षण और बुनियादी ढांचे का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब इसरो (ISRO) का लक्ष्य वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन लॉन्च करना है, जबकि 2027 तक पहले मानवयुक्त गगनयान मिशन को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी तेज़ी से चल रही है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि गगनयान मिशन के लिए विकसित की जा रही लगभग सभी प्रमुख प्रणालियों का विकास और प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है। इनमें मानव रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3), ऑर्बिटल मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम, एवियोनिक्स, ताप सुरक्षा प्रणाली और अवरोहण प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।

मानव रेटेड रॉकेट और ऑर्बिटल मॉड्यूल पूरी तरह तैयार
सरकार के अनुसार, मानव रेटेड लॉन्च व्हीकल HLVM3 के सभी प्रपल्शन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। वहीं, क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की प्रपल्शन प्रणाली, पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS), ताप सुरक्षा प्रणाली और एंड-टू-एंड एवियोनिक्स का विकास एवं परीक्षण भी पूरा कर लिया गया है। इससे भारत पहली बार मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक स्वदेशी तकनीकी क्षमता हासिल करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।

क्रू एस्केप सिस्टम और सुरक्षा परीक्षण सफल
मानव मिशन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसरो ने क्रू एस्केप सिस्टम (CES) की पांचों मोटरों का विकास और स्थैतिक परीक्षण पूरा कर लिया है। सिस्टम की सभी संरचनाएं प्रमाणित की जा चुकी हैं। इसके अलावा टीवी-डी1 (TV-D1) टेस्ट मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जिसमें उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम का सफल प्रदर्शन हुआ। अवरोहण प्रणाली के लिए आईएडीटी-01 और आईएडीटी-02 परीक्षण भी सफल रहे हैं, जबकि टीवी-डी2 मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

बुनियादी ढांचा और संचार नेटवर्क तैयार
इसरो ने गगनयान मिशन के लिए आवश्यक ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, नियंत्रण सुविधा, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र तथा दूसरे प्रक्षेपण परिसर में आवश्यक संशोधन पूरे कर लिए हैं। मिशन संचालन के लिए ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क को अंतिम रूप दिया जा चुका है। आईडीआरएसएस-1 फीडर स्टेशन और स्थलीय संचार नेटवर्क भी स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ समन्वय के लिए कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

2026 में पहला मानवरहित मिशन, 2027 में मानवयुक्त उड़ान
इसरो ने बताया कि व्योममित्र हाफ-ह्यूमनॉइड सहित कई नई तकनीकों के प्रदर्शन के लिए पहला मानवरहित मिशन 2026 की चौथी तिमाही में भेजा जाएगा। इसके बाद पहले मानव मिशन जैसी संरचना वाले दो और मानवरहित मिशन संचालित किए जाएंगे। इन सभी परीक्षणों के सफल होने के बाद 2027 में पहला भारतीय मानवयुक्त गगनयान मिशन अंतरिक्ष की उड़ान भरेगा।

2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का लक्ष्य
भारत केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार ने वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station - BAS) को संचालन में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसरो ने पांच मॉड्यूल वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र डिजाइन तैयार कर ली है। सरकार ने पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है तथा इसकी विभिन्न तकनीकी प्रणालियों पर कार्य तेज़ी से जारी है।

20,193 करोड़ रुपये की मंजूरी और वैश्विक सहयोग
सरकार ने सितंबर 2024 में आठ प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों के लिए 20,193 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन को मंजूरी दी थी। गगनयान कार्यक्रम में इसरो को कई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों का भी सहयोग मिल रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) नेटवर्क संचालन सहायता प्रदान कर रही है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी क्रू और क्रू मॉड्यूल रिकवरी में सहयोग कर रही है। फ्रांस की CNES इसरो के फ्लाइट सर्जनों और ग्राउंड सपोर्ट टीमों को प्रशिक्षण दे रही है। वहीं रूस की रोस्कोस्मोस के सहयोग से भारतीय गगनयात्रियों को गागरिन कॉस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण दिया गया है तथा क्रू सीट, फ्लाइट सूट, व्यूपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

भारत का गगनयान मिशन अब केवल एक वैज्ञानिक परियोजना नहीं, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता, वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व और विकसित भारत के विजन का प्रतीक बनता जा रहा है। यदि तय समयसीमा के अनुसार मिशन सफल रहता है, तो भारत मानव को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजने वाले चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूती से अपना स्थान दर्ज करेगा।