एयरोनॉटिक्स 2047 संगोष्ठी शुरू, भारत की एयरोस्पेस शक्ति को नई दिशा

Sun 04-Jan-2026,11:59 PM IST +05:30

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एयरोनॉटिक्स 2047 संगोष्ठी शुरू, भारत की एयरोस्पेस शक्ति को नई दिशा एयरोनॉटिक्स 2047 संगोष्ठी बेंगलुरु में
  • एयरोनॉटिक्स 2047 संगोष्ठी भारत को 2047 तक वैश्विक एयरोस्पेस लीडर बनाने की रणनीति पर केंद्रित है।

  • एलसीए तेजस की 25 वर्षों की यात्रा स्वदेशी रक्षा क्षमता की सबसे बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत की गई।

  • डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, AI और अगली पीढ़ी की विमान तकनीकों पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार।

Karnataka / Bangalore Urban :

बेंगलुरु/ भारत की वैमानिकी और एयरोस्पेस क्षमताओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से 4 जनवरी 2026 को बेंगलुरु में एक अहम राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत हुई। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के नेतृत्व में आयोजित इस दो दिवसीय आयोजन में रक्षा, उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान जगत के दिग्गज एक मंच पर एकत्र हुए हैं। यह संगोष्ठी न केवल भविष्य की एयरोस्पेस तकनीकों पर केंद्रित है, बल्कि भारत को 2047 तक वैश्विक वैमानिकी शक्ति बनाने के रोडमैप को भी रेखांकित करती है।

एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ का शुभारंभ 4 जनवरी 2026 को बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) में हुआ। इस संगोष्ठी का उद्घाटन भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस के 25 वर्ष पूर्ण होने पर ADA को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय वायुसेना को पूर्ण रूप से परिचालन तैयार रखने के लिए रक्षा परियोजनाओं की समयबद्ध सुपुर्दगी अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आयात पर निर्भरता कम करना अनिवार्य है। उन्होंने स्वदेशी, अत्याधुनिक और भविष्य-उन्मुख प्रौद्योगिकियों के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।

‘एयरोनॉटिक्स 2047’ संगोष्ठी में उद्योग जगत, शिक्षाविदों, सरकारी प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स, MSME और एयरोस्पेस विशेषज्ञों की व्यापक भागीदारी देखने को मिल रही है। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अगली पीढ़ी के विमानों के डिजाइन, निर्माण और संचालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर विचार-विमर्श करना है।

कार्यक्रम के दौरान डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की वायुगतिकी, प्रणोदन प्रणालियां, उड़ान परीक्षण तकनीक, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी, प्रमाणन से जुड़ी चुनौतियां, उड़ान नियंत्रण प्रणाली, एवियोनिक्स, AI आधारित विमान डिजाइन और सटीक विनिर्माण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है।

संगोष्ठी में LCA तेजस के प्रारंभिक डिजाइन से लेकर इसके स्क्वाड्रन में शामिल होने तक की यात्रा को भी विस्तार से प्रस्तुत किया जा रहा है। ADA द्वारा विकसित तेजस अब तक 5,600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण पूरे कर चुका है। इसके विकास में 100 से अधिक डिजाइन और अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी रही है।

LCA Mk-1A, तेजस का उन्नत संस्करण है, जो भारतीय वायुसेना की परिचालन आवश्यकताओं को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। इसके साथ ही LCA Mk-II और नेवल LCA परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है। संगोष्ठी के अंतर्गत PSU, DPSU, निजी उद्योग और MSME अपने स्वदेशी एयरोस्पेस उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं, जो भारत के बढ़ते आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है।