ABS योजना से NBA को ₹2.40 करोड़

Fri 13-Feb-2026,04:26 PM IST +05:30

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  • सरसों और हाइब्रिड चावल के व्यावसायिक उपयोग से 2.30 करोड़ रुपये का बड़ा अंशदान, किसानों और स्थानीय समुदायों को मिलेगा लाभ।

  • कुल एबीएस संग्रह 266 करोड़ रुपये पार, जैव विविधता संरक्षण और समान लाभ-साझाकरण को मिला संस्थागत बल।

Delhi / Delhi :

Delhi/ जैव विविधता संरक्षण और संसाधनों के न्यायसंगत लाभ-साझाकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने एबीएस तंत्र के अंतर्गत 2.40 करोड़ रुपये की नई प्राप्ति दर्ज की है। यह योगदान उन संस्थाओं से मिला है जो कृषि जैविक संसाधनों पर आधारित अनुसंधान और वाणिज्यिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं।

प्राप्त राशि में 2.30 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा मेसर्स पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन से सरसों और हाइब्रिड चावल की व्यावसायिक किस्मों के उपयोग के लिए मिला है। इसके अतिरिक्त, मेसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड, मेसर्स टोकिता सीड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अवालो इंक तथा मेसर्स सी6 एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से भी लाभ-साझाकरण अंशदान प्राप्त हुआ है।

इन संस्थाओं ने चावल, प्याज, करेला, सरसों, कपास, लौकी, बैंगन, मिर्च, खीरा, भिंडी, तोरी, टमाटर और समुद्री शैवाल जैसी विविध कृषि प्रजातियों और हाइब्रिड किस्मों का उपयोग उन्नत बीज और कृषि उत्पादों के विकास में किया। इससे कृषि उत्पादकता और बाजार क्षमता दोनों को बढ़ावा मिला है।

एबीएस व्यवस्था के अंतर्गत प्राप्त धनराशि संबंधित किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों और जनक किस्में उपलब्ध कराने वाले संस्थानों के साथ साझा की जाएगी। यह मॉडल न केवल जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करता है, बल्कि ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एनबीए ने हाल के वर्षों में प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि उद्योग जगत के लिए अनुपालन सुगम हो सके। बीज क्षेत्र एबीएस ढांचे में प्रमुख योगदानकर्ता बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक बीज क्षेत्र से 3.42 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं।

इस नवीनतम संग्रह के साथ एनबीए द्वारा अब तक प्राप्त कुल एबीएस राशि 266 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। इनमें से 83 करोड़ रुपये केवल बीज क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं, जिससे यह लाल चंदन के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।

एनबीए भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लागू करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जैव विविधता पर सम्मेलन और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप एबीएस तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य-13 की प्राप्ति की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एबीएस व्यवस्था के माध्यम से जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न आर्थिक लाभ का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होगा और जैव विविधता संरक्षण को दीर्घकालिक आधार मिलेगा।