प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर-पंडुम महोत्सव की सराहना, अमित शाह ने पर्यटन बताया

Thu 12-Feb-2026,11:12 AM IST +05:30

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प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर-पंडुम महोत्सव की सराहना, अमित शाह ने पर्यटन बताया
  • प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर-पंडुम महोत्सव की सराहना की और बस्तर के विकास और आत्मविश्वास को बताया।

  • महोत्सव में स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को मंच मिला, जिससे उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान मिली।

Chhattisgarh / Bastar :

Bastar/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘बस्तर-पंडुम’ महोत्सव की प्रशंसा की और कहा कि बस्तर अब विकास और आत्मविश्वास की नई कहानी लिख रहा है। महोत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उन्होंने बस्तर को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरता क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता देश और विदेश से पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। यह महोत्सव बस्तर के विकास और स्थानीय प्रतिभाओं को सम्मानित करने का मंच बना।
‘बस्तर-पंडुम’ महोत्सव का समापन समारोह बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में बस्तर के लोगों की मेहनत और संस्कृति की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर अब न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास में भी नई पहचान बना रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थल इसे देश का महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए क्षेत्र के विकास और रोजगार के अवसर बढ़ा रही है।

महोत्सव में स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को भी मंच प्रदान किया गया, जिससे उनकी प्रतिभा और कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। आयोजकों ने बताया कि इस बार महोत्सव में देशभर से हजारों पर्यटक और नागरिक शामिल हुए, जिससे बस्तर की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक दृष्टि को बड़ा लाभ हुआ।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री दोनों ने बस्तर की नई पहचान को मजबूत बनाने के लिए सरकार की नीतियों और प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं और कलाकारों की भागीदारी बस्तर को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। महोत्सव का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक उत्सव को बढ़ावा देना था, बल्कि बस्तर के विकास और सामाजिक समृद्धि की नई कहानी को उजागर करना भी था।