चांदी में 40% की बड़ी गिरावट
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 40% तक टूटी, रिकॉर्ड हाई से भारी गिरावट ने कमोडिटी निवेशकों की चिंता बढ़ाई
विशेषज्ञों की चेतावनी, मुनाफावसूली और डॉलर मजबूती से कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है
Delhi/ अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब चांदी और सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। चांदी में आई भारी बिकवाली ने बाजार में हलचल मचा दी है और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमतों में एक ही दिन में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसका भाव कॉमेक्स पर फिसलकर लगभग 64 डॉलर प्रति औंस तक आ गया। यह स्तर अपने ऑल टाइम हाई से करीब 40 प्रतिशत नीचे है।
बीते महीने चांदी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 120 डॉलर प्रति औंस का ऐतिहासिक उच्च स्तर छुआ था। तेजी के इस दौर में बड़ी संख्या में निवेशकों ने ऊंचे दामों पर खरीदारी की थी। अब अचानक आई गिरावट से उन्हें भारी नुकसान का डर सता रहा है। लगातार टूटते भावों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के दामों में लगातार दबाव बना हुआ है। 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी ने 29 जनवरी को 4,30,048 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड हाई बनाया था। इसके बाद से अब तक इसमें करीब 1,76,233 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट आ चुकी है।
गुरुवार को MCX पर शुरुआती कारोबार में चांदी का भाव गिरकर 2,30,499 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। हालांकि दिन के अंत में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद चांदी 2,43,815 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। यानी एक ही दिन में निवेशकों को करीब 25,035 रुपये प्रति किलो का झटका लगा।
सोने की कीमतों में भी दबाव बना हुआ है। MCX पर 24 कैरेट सोने (10 ग्राम) ने 29 जनवरी को 1,93,096 रुपये का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद से अब तक सोने में लगभग 41,025 रुपये की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। गुरुवार को सोना 1,52,071 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर मुनाफावसूली, डॉलर की मजबूती और आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।