बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का असर: लिंग अनुपात और शिक्षा में बड़ा सुधार
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना से देश में जन्म के समय लिंग अनुपात और बालिकाओं की शिक्षा में लगातार सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया।
माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का नामांकन बढ़ना सामाजिक सोच में बदलाव और सरकारी प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
Delhi/ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP) योजना ने पिछले एक दशक में भारत में बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत पहचान बनाई है। 22 जनवरी 2015 को शुरू हुई यह पहल अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का राष्ट्रीय आंदोलन बन चुकी है। नीति आयोग और केंद्रीय मंत्रालयों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के चलते देश में बाल लिंग अनुपात और लड़कियों की शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य जन्म के समय घटते बाल लिंग अनुपात और लैंगिक असमानता की समस्या का समाधान करना रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह योजना अब मिशन शक्ति के तहत एकीकृत दृष्टिकोण से लागू की जा रही है। नीति आयोग द्वारा वित्त वर्ष 2019 से 2024 के बीच किए गए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में यह स्पष्ट हुआ है कि बीबीबीपी योजना अत्यंत प्रासंगिक, प्रभावी और डेटा-आधारित सेवाओं के माध्यम से लैंगिक चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंग अनुपात 2014-15 में 918 था, जो 2024-25 में बढ़कर 929 हो गया है। यह सुधार बीबीबीपी जैसे अभियानों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।
वहीं शिक्षा मंत्रालय के यू-डायस (UDISE) आंकड़ों के मुताबिक, माध्यमिक स्तर पर विद्यालयों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 80.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि लड़कियों की शिक्षा को लेकर समाज में जागरूकता और स्वीकार्यता बढ़ी है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि बीबीबीपी योजना सरकारी प्रयासों, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता के सामूहिक सहयोग का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़ों में सुधार नहीं, बल्कि बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।