TDB का एंटीबायोटिक-फ्री स्मार्ट प्रोटीन प्रोजेक्ट को समर्थन

Fri 13-Feb-2026,04:55 PM IST +05:30

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TDB का एंटीबायोटिक-फ्री स्मार्ट प्रोटीन प्रोजेक्ट को समर्थन TDB-Antibiotic-Free-Smart-Protein-Elgrow-Project
  • ELGROW™ प्रोटीन एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड से समृद्ध है, जो फीड कन्वर्ज़न सुधारकर एंटीबायोटिक निर्भरता घटाने में सहायक होगा।

  • परियोजना से छोटे किसानों को किफायती, टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले फीड विकल्प मिलेंगे, जिससे राष्ट्रीय फीड सुरक्षा मजबूत होगी।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ आत्मनिर्भर भारत विज़न को मजबूत करते हुए भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने एंटीबायोटिक-फ्री पशु पोषण समाधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। टीडीबी ने भुवनेश्वर स्थित एल्मेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है, जिसके तहत पोल्ट्री, एक्वाकल्चर और पेट फूड के लिए एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (एएमपी)-समृद्ध स्मार्ट प्रोटीन के विकास और वाणिज्यीकरण को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

यह परियोजना ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन के व्यावसायिक उत्पादन पर केंद्रित है। यह एक प्रिसिजन-इंजीनियर्ड, एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (एएमपी) से भरपूर फंक्शनल प्रोटीन है, जिसे कंपनी के स्वदेशी इंसेक्ट बायोमैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से विकसित किया गया है। इस तकनीक का उद्देश्य एंटीबायोटिक ग्रोथ प्रमोटर (एजीपी) के विकल्प के रूप में सुरक्षित और टिकाऊ समाधान प्रदान करना है।

ओडिशा के भुवनेश्वर मुख्यालय वाली इस कंपनी का नेतृत्व डॉ. जयशंकर दास कर रहे हैं। कंपनी पोल्ट्री, एक्वाकल्चर और पेट फूड उद्योगों के लिए सस्टेनेबल, एंटीबायोटिक-फ्री और प्रिसिजन न्यूट्रिशन सॉल्यूशन पर कार्य कर रही है। ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन को फीड कन्वर्ज़न रेश्यो (एफसीआर) सुधारने, रोग की घटनाएं कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह प्रौद्योगिकी स्थानीय कृषि-खाद्य और औद्योगिक अपशिष्ट को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करती है, जिससे आयात निर्भरता घटती है और सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा मिलता है। कंपनी ELGROW™ प्रोटीन मील के साथ ELGROW™ ऑयल भी तैयार कर रही है, जिसमें लिनोलिक एसिड (ओमेगा-6) जैसे आवश्यक फैटी एसिड मौजूद हैं, जो पशुधन की वृद्धि और प्रजनन के लिए लाभकारी हैं।

इस परियोजना से बड़े पोल्ट्री और एक्वाकल्चर इंटीग्रेटर्स के साथ-साथ छोटे और मध्यम किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे लागत प्रभावी और उच्च प्रदर्शन वाले फीड विकल्प उपलब्ध होंगे। साथ ही यह पहल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर), फीड सुरक्षा और बढ़ती निवेश लागत जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायक होगी।

टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि यह सहयोग स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास से विकसित तकनीकों के वाणिज्यीकरण को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक-फ्री प्रिसिजन न्यूट्रिशन समाधान भारत की खाद्य सुरक्षा, निर्यात प्रतिस्पर्धा और पशुधन क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए रणनीतिक रूप से अहम हैं।