प्रसाद योजना के तहत 54 परियोजनाएं मंजूर

Fri 13-Feb-2026,05:06 PM IST +05:30

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  • प्रसाद योजना के तहत 28 राज्यों में 54 परियोजनाएं स्वीकृत, 1,726.74 करोड़ रुपये से तीर्थस्थलों का समग्र विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूती।

  • भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष फोकस, सीसीटीवी, कतार प्रबंधन और पेयजल जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल।

Delhi / Delhi :

Delhi/ पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित “तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक एवं विरासत संवर्धन अभियान” (PRASAD) योजना के तहत देश के प्रमुख तीर्थ और विरासत स्थलों के विकास को गति दी जा रही है। मंत्रालय ने अब तक 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 1,726.74 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 54 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है।

इन स्वीकृत परियोजनाओं में महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर के विकास से जुड़ी परियोजना भी शामिल है, जिसे वर्ष 2017-18 में 45.41 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। इस योजना का उद्देश्य तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं को उन्नत कर श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाना है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रसाद योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है। प्राप्त प्रस्तावों की जांच निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाती है और वित्तीय सहायता निधि की उपलब्धता तथा शर्तों की पूर्ति के आधार पर दी जाती है। वर्तमान में एलोरा स्थित श्री ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के विकास के लिए कोई प्रस्ताव मंत्रालय के विचाराधीन नहीं है।

भीड़ प्रबंधन और वहन क्षमता को इस योजना में विशेष महत्व दिया गया है। तीर्थस्थलों के चयन और विकास के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए कतार प्रबंधन परिसर, प्रतीक्षा कक्ष, मार्गों का चौड़ीकरण और सुरक्षित पहुंच मार्ग जैसे उपाय शामिल किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण कक्ष, अग्नि सुरक्षा तंत्र, प्रकाश व्यवस्था, रेलिंगयुक्त पगडंडियां, साइनबोर्ड, पेयजल और स्वच्छ शौचालय जैसी आधारभूत सुविधाओं को भी परियोजनाओं में सम्मिलित किया गया है।

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित राज्य सरकारें या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन स्थानीय निकायों, मंदिर प्राधिकरणों, धार्मिक ट्रस्टों और अन्य हितधारकों से परामर्श कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करते हैं। परियोजनाओं का कार्यान्वयन भी राज्यों द्वारा समन्वित रूप से किया जाता है।

प्रसाद योजना का उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा विकसित करना नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति का संरक्षण, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना भी है। बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के कारण तीर्थस्थलों पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय व्यापार और आजीविका को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस प्रकार, प्रसाद योजना आध्यात्मिक पर्यटन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।