धमतरी का बीरेतरा बना मिसाल
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धमतरी के बीरेतरा गांव में शाम 6 बजे के बाद छात्रों के घर से बाहर निकलने पर रोक और 5,000 रुपये जुर्माना लागू।
स्कूल और पंचायत की संयुक्त पहल से बोर्ड परीक्षा में 90% और 100% परिणाम का लक्ष्य निर्धारित।
Dhamtari/ छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का बीरेतरा गांव इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सामूहिक निर्णय से बड़ा बदलाव आया है। बढ़ते नशे और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ते नकारात्मक असर को देखते हुए गांव ने सख्त नियम लागू किए हैं। शाम 6 बजे के बाद बच्चों के घर से बाहर निकलने पर रोक और नशे के खिलाफ भारी जुर्माने ने बीरेतरा को एक आदर्श गांव की पहचान दिलाई है।
धमतरी जिले के इस गांव में रोज शाम 6 बजे के बाद सन्नाटा छा जाता है। पंचायत और स्कूल प्रबंधन के संयुक्त निर्णय के अनुसार, 6 बजे के बाद किसी भी छात्र को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। नियम तोड़ने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है। इस सख्ती का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण देना है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस निर्णय का खुलकर समर्थन किया है। परिणामस्वरूप बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं और मोबाइल या बेवजह घूमने की आदत से दूर हो रहे हैं। गांव में अनुशासन का माहौल बनने से छात्रों में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।
बीरेतरा में नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति भी लागू की गई है। नशा करते पकड़े जाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। सख्त नियमों के बाद गांव में नशीले पदार्थों की बिक्री लगभग बंद हो चुकी है। कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से तंबाकू और गुटखा बेचना छोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव पहले से अधिक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण की ओर बढ़ रहा है।
स्कूल और पंचायत की एकजुटता इस पहल की सबसे बड़ी ताकत बनी है। स्कूल प्रबंधन ने इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत और 12वीं बोर्ड परीक्षा में 100 प्रतिशत परिणाम का लक्ष्य रखा है। अनुशासित माहौल ने छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाया है और अभिभावकों में भी उम्मीद जगी है।
बीरेतरा गांव की यह पहल अब पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी है। यह उदाहरण दिखाता है कि सामाजिक संकल्प और सामूहिक जिम्मेदारी से शिक्षा और नशामुक्ति दोनों लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।