भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से किसानों और कृषि निर्यात को नई ताकत

Tue 27-Jan-2026,06:14 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से किसानों और कृषि निर्यात को नई ताकत India-EU-Free-Trade-Agreement-Agriculture-Benefits
  • भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से किसानों, कृषि निर्यात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजारों में नई मजबूती और अवसर मिलेंगे।

  • चाय, कॉफी, मसाले और प्रोसेस्ड फूड जैसे भारतीय कृषि उत्पादों को यूरोप में बेहतर पहुंच और मूल्य मिलेगा।

Karnataka / Dandeli :

Madhya Pradesh/ केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता भारत-ईयू साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इस समझौते से चाय, कॉफी, मसाले, टेबल अंगूर, खीरा, अचार वाली खीरा, सूखे प्याज, मीठा मक्का, चुनिंदा फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड जैसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह करार निर्यात वृद्धि और घरेलू प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाते हुए दोनों पक्षों के किसान समुदायों के हितों की रक्षा करता है।

श्री चौहान ने कहा कि आज भारत केवल स्वयं आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि पूरी दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। भारत की कृषि शक्ति अब वैश्विक मंच पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। देश चावल उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर पहुंच चुका है और कृषि विकास दर ने हरित क्रांति के दौर को भी पीछे छोड़ दिया है।

एफटीए के प्रभावों पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और निवेश के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक दूरगामी कदम है।

किसानों के हितों को सर्वोपरि बताते हुए मंत्री ने कहा कि घटिया पेस्टिसाइड और नकली बीज किसानों की कमर तोड़ देते हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार एक सख्त पेस्टिसाइड अधिनियम और नया बीज अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण इनपुट और सुरक्षित भविष्य मिल सके।

उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोजगारयुक्त, गरीबी-मुक्त और स्वावलंबी गांवों का निर्माण जरूरी है। इसी उद्देश्य से ‘विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम’ लागू किया जा रहा है, जिससे गांव संपूर्ण विकसित ग्राम के रूप में उभरेंगे और ग्रामीण भारत विकास की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा होगा।