ट्रंप का दावा: ईरान की सैन्य ताकत कमजोर
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Trump-Iran-Strikes-Middle-East-Security
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हालिया हमलों का उद्देश्य मध्य पूर्व में परमाणु खतरे को खत्म करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नौसेना जल्द तैनात हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग सुरक्षित रहेगा।
Iran Strikes/ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य परमाणु खतरे को खत्म करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना था। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका अब ऐसी रणनीतिक स्थिति में है, जो पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने दावा किया कि हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही, उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों की सुरक्षा जल्द बढ़ाने का संकेत भी दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हाल ही में किए गए सैन्य हमले बेहद बड़े और निर्णायक थे। उनका दावा है कि इन हमलों के बाद ईरान की नौसेना, वायुसेना और कई सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य क्षेत्र में परमाणु खतरे को खत्म करना और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सैन्य ताकत अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान अमेरिकी सेना को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से मजबूत किया गया था। उनके मुताबिक इसी तैयारी का परिणाम है कि अमेरिका आज मध्य पूर्व में निर्णायक भूमिका निभा पा रहा है।
पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए तुरंत तैनात होगी, तो ट्रंप ने कहा कि यह प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू होगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।
ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अमेरिका और Benjamin Netanyahu के नेतृत्व वाले इज़रायल के उद्देश्य पूरी तरह समान नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि दोनों देश अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लेते हैं, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों की चिंता समान है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियों पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।