पुणे IITM में ECR कार्यशाला 2026: AI, जलवायु विज्ञान और रिसर्च पर मंथन
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IITM Pune
पुणे के आईआईटीएम में ईसीआर कार्यशाला 2026 का आयोजन हुआ।
लगभग 120 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
एआई, मशीन लर्निंग, जलवायु विज्ञान और रिसर्च करियर पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
Pune / क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक भारत के भविष्य को नई दिशा देने जा रही हैं? पुणे में देश-विदेश के लगभग 120 शोधकर्ता एक मंच पर जुटे, जहां करियर, जलवायु विज्ञान और अनुसंधान की बड़ी चुनौतियों पर मंथन हुआ।
महाराष्ट्र के पुणे से विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान जगत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान यानी आईआईटीएम में 11 अक्टूबर 2026 को अर्ली करियर रिसर्चर, यानी शुरुआती करियर के शोधकर्ताओं के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। “द ईसीआर नेक्सस: कनेक्टिंग वॉयसेस, टूल्स, एंड साइंस टू सोसाइटी” नाम की इस कार्यशाला का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों को नए अवसरों, आधुनिक तकनीकों और वैश्विक शोध समुदाय से जोड़ना था।
यह आयोजन उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन यानी ईएसटीआईसी-2026 के पूर्वावलोकन कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 120 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें युवा शोधकर्ता, वरिष्ठ वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, संपादक और विभिन्न संस्थानों से जुड़े पेशेवर शामिल हुए।
कार्यक्रम के मुख्य भाषण में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत के भविष्य के विकास में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर भी प्रकाश डाला।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव ने स्वागत भाषण दिया। वैज्ञानिक आयोजन समिति के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। वहीं, डॉ. सुवर्णा फडणवीस ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सत्र संयोजक डॉ. अदिति मोदी ने कार्यशाला की रूपरेखा बताई।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पृथ्वी विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आयोजित मुख्य व्याख्यान रहा। मैरीलैंड विश्वविद्यालय की डॉ. मारिया मोलिना ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, एक विशेषज्ञ पैनल चर्चा में अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगठनों और शोध प्रयोगशालाओं में करियर के अवसरों पर चर्चा हुई।
इस चर्चा में एनवीडिया, विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम, लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी, टोक्यो विश्वविद्यालय और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। शोधकर्ताओं के सामने मौजूद वित्तपोषण की चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय अवसरों, कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच, वैज्ञानिक नेतृत्व और शोधकर्ताओं की आवाजाही जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में केवल चर्चाएं ही नहीं हुईं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों ने विषयगत समूह चर्चाओं और विचार-मंथन सत्रों में हिस्सा लिया। नेचर पोर्टफोलियो और स्प्रिंगर नेचर के प्रतिनिधियों के साथ ‘संपादकों से मिलिए’ सत्र आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त, डॉ. बिर्गिट हास्लर के समन्वय में पृथ्वी प्रणाली मॉडल मूल्यांकन उपकरण यानी ईएसएमवैलटूल पर तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
यंग अर्थ सिस्टम साइंटिस्ट्स समुदाय ने युवा शोधकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के अवसरों की जानकारी भी साझा की। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक सहयोग, कौशल विकास और विभिन्न विषयों के बीच संवाद को बढ़ावा देना था।
गौरतलब है कि ईएसटीआईसी-2026 का उद्देश्य रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करना, विज्ञान को गति देना और प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाना है। यह सम्मेलन भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के अनुरूप वैज्ञानिक उत्कृष्टता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सतत विकास को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
कुल मिलाकर, पुणे में आयोजित यह कार्यशाला युवा वैज्ञानिकों को नई तकनीकों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामाजिक जरूरतों से जुड़े अनुसंधान के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।