इंदौर में ‘जात्रा-2026’: जनजातीय औषधि, कला और वन ज्ञान का संगम
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Jatra-2026-Indore-Tribal-Medicine-Festival
इंदौर के गांधी हॉल में 20–22 फरवरी 2026 तक ‘जात्रा-2026’ में जनजातीय औषधि, वनोपज और पारंपरिक ज्ञान का प्रदर्शन होगा।
धार, झाबुआ और अलीराजपुर की औषधीय परंपराओं, पिथोरा आर्ट, भगोरिया फोटो प्रदर्शनी और 100 से अधिक स्टॉल मुख्य आकर्षण रहेंगे।
Indore/ शहरों में स्वास्थ्य की परिभाषा तेजी से दवाओं और त्वरित इलाज तक सिमटती जा रही है, जबकि पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति से जुड़ी चिकित्सा पद्धतियां पीछे छूटती दिखती हैं। इसी दूरी को पाटने के उद्देश्य से इंदौर में पहली बार ‘जात्रा-2026’ का आयोजन होने जा रहा है। 20 से 22 फरवरी 2026 तक ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर में आयोजित यह तीन दिवसीय उत्सव जनजातीय औषधीय परंपरा, कला और जीवनदृष्टि को शहर के सामने लाएगा।
धार, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे जनजातीय अंचलों में जंगल को आज भी जीवित औषधालय माना जाता है। वहां जड़ी-बूटियों और वनोपज की पहचान उनके गुणों और मौसम के अनुरूप उपयोग से होती है। किस मौसम में कौन-सी जड़ उपयोगी है, कौन-सी पत्ती किस रोग में काम आती है, यह ज्ञान पीढ़ियों के अनुभव से संजोया गया है। ‘जात्रा-2026’ इसी पारंपरिक औषधीय समझ को प्रदर्शित करेगा।
यह आयोजन जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में होगा। समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी के अनुसार, आदिवासी समाज का ज्ञान अनुभव की कमाई है और आधुनिकता के बीच इसे संरक्षित करना जरूरी है। आयोजन में 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां औषधियां, वनोपज, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित होंगे। संस्था ट्रायबल फाउंडेशन द्वारा 25 से अधिक पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की जाएंगी।
सांस्कृतिक आकर्षणों में जनजातीय नृत्य, लोक प्रस्तुतियां और पारंपरिक व्यंजन शामिल होंगे। 21 फरवरी को ‘अमू काका बाबा न पोरिया’ फेम गायक आनंदीलाल भावेल अपनी टीम के साथ लाइव प्रस्तुति देंगे। इसके अतिरिक्त ‘पिथोरा’ आर्ट गैलरी, भगोरिया पर्व पर आधारित फोटो प्रदर्शनी और जनजातीय साहित्य व परिधानों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र होंगे।
आयोजन के कोषाध्यक्ष गिरीश चव्हाण ने कहा कि जनजातीय वनोपज केवल उत्पाद नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह आयोजन संवाद का मंच बनेगा, जहां लोग समझ सकेंगे कि सेहत केवल दवाओं से नहीं, बल्कि जीवनशैली और प्रकृति के सामंजस्य से बनती है।
‘जात्रा-2026’ केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि अनुभव का अवसर होगा। यहां आगंतुक जड़ों, छालों और बीजों के औषधीय उपयोग के बारे में जान सकेंगे। यह उत्सव इंसान और प्रकृति के बीच उस भरोसे को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कहीं पीछे छूट गया है।