सूर्य ग्रहण 2026: रिंग ऑफ फायर

Tue 17-Feb-2026,01:31 PM IST +05:30

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सूर्य ग्रहण 2026: रिंग ऑफ फायर Solar-Eclipse-2026-Ring-Of-Fire-India-Impact
  • 2026 का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल और धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।

  • रिंग ऑफ फायर के दौरान सूर्य का 96 प्रतिशत भाग चंद्रमा से ढकेगा, यह दृश्य अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में दिखेगा।

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur/ साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान और ज्योतिष, दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह एक दुर्लभ ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य का अधिकांश भाग चंद्रमा से ढक जाएगा। हालांकि यह अद्भुत दृश्य भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी इसे लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। ग्रहण का समय, इसका धार्मिक प्रभाव, सूतक काल और राशियों पर संभावित असर को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। इस बार का ग्रहण वलयाकार होगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘एन्युलर सोलर इक्लिप्स’ कहा जाता है। इस दौरान लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक सूर्य का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा से ढका रहेगा और केवल बाहरी चमकीला घेरा दिखाई देगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।

भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू होकर शाम 7:57 बजे समाप्त होगा। मध्यकाल शाम 5:40 बजे रहेगा। कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की होगी। हालांकि यह दृश्य भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के पट बंद नहीं किए जाएंगे और सामान्य दिनचर्या प्रभावित नहीं होगी।

यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरिशस और अंटार्कटिका में दिखाई देगा। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, जैसे अर्जेंटीना और चिली में भी इसका प्रभाव देखा जा सकेगा। भारत में दृश्यता न होने के कारण धार्मिक दृष्टि से किसी विशेष प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में माना जा रहा है। सूर्य-चंद्र-राहु की युति से ग्रहण योग बन रहा है। कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि इस दौरान संचार और इंटरनेट सेवाओं में अस्थायी व्यवधान संभव है, हालांकि यह केवल अनुमान हैं। मंगल का अष्टम भाव में होना तनाव का संकेत माना जाता है, लेकिन मंगल के अस्त होने से इसकी तीव्रता कम मानी जा रही है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है और इसका दैनिक जीवन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता। जहां यह दिखाई देगा, वहां लोग विशेष चश्मों का उपयोग कर इसे देख सकते हैं। बिना सुरक्षा उपकरणों के सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां लोग मंत्र जाप, ध्यान और दान करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक रूप से भोजन न करने जैसी परंपराओं का कोई प्रमाणित आधार नहीं है। कुल मिलाकर, 2026 का पहला सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जो विज्ञान के लिए अध्ययन का विषय और ज्योतिष के लिए विश्लेषण का अवसर प्रदान करता है।