बंगाल में सत्ता बदलते ही बदला नवान्न का रंग, भगवा रोशनी में चमका राज्य सचिवालय

Sun 10-May-2026,11:58 PM IST +05:30

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बंगाल में सत्ता बदलते ही बदला नवान्न का रंग, भगवा रोशनी में चमका राज्य सचिवालय  Nabanna Saffron Lighting
  • नवान्न भगवा रोशनी में जगमगाया. 

  • सत्ता परिवर्तन के बाद बदली सचिवालय की पहचान. 

  • सोशल मीडिया पर वायरल हुई नई तस्वीरें. 

Delhi / Delhi :

Delhi / पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब उसकी झलक राज्य के प्रशासनिक भवनों में भी दिखाई देने लगी है। राज्य सचिवालय नवान्न का रंग-रूप बदलना इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। वर्षों तक सफेद और नीली रोशनी से जगमगाने वाला नवान्न अब भगवा रोशनी में चमकता नजर आ रहा है।

भाजपा सरकार बनने के अगले ही दिन रविवार शाम को हावड़ा के मंदिरतल्ला स्थित नवान्न की इमारत भगवा रंग की लाइटों से रोशन दिखाई दी। यह बदलाव इतना अचानक और अलग था कि आसपास से गुजरने वाले लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं। विद्यासागर सेतु और आसपास के इलाकों से गुजर रहे लोगों ने इस नए दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया और सोशल मीडिया पर तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं।

दरअसल, पिछले कई वर्षों से नवान्न की पहचान नीले और सफेद रंग से जुड़ी रही थी। यह रंग संयोजन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक शैली और पसंद का प्रतीक माना जाता था। राज्य की कई सरकारी इमारतों, पुलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी यही रंग प्रमुख रूप से दिखाई देता था। लेकिन अब भाजपा सरकार बनने के बाद नवान्न का भगवा रंग में दिखाई देना राजनीतिक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई लोग इसे नई सरकार की वैचारिक पहचान से जोड़कर भी देख रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था में नए दौर की शुरुआत का प्रतीक बन सकता है।

हालांकि, इस बदलाव को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। भाजपा समर्थक इसे “नए बंगाल” की तस्वीर बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों के समर्थकों का कहना है कि सरकार को रंग बदलने के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल नवान्न की भगवा रोशनी पूरे बंगाल में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह बदलाव सिर्फ एक इमारत की लाइटिंग तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर और सत्ता परिवर्तन के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।