अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: बेंगलुरु में योग कार्यक्रम, 650 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

Sun 17-May-2026,11:54 PM IST +05:30

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: बेंगलुरु में योग कार्यक्रम, 650 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा International Yoga Day 2026
  • बेंगलुरु में योग दिवस 2026 कार्यक्रम आयोजित. 

  • 650 प्रतिभागियों ने लिया योग सत्र में हिस्सा. 

  • विशेषज्ञों ने योग और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा. 

Delhi / Delhi :

Delhi / अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के 100 दिनों की काउंटडाउन श्रृंखला के तहत एक महत्वपूर्ण आयोजन बेंगलुरु के जिगानी स्थित प्रशांति कुटीरम परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (S-VYASA) और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह आयोजन काउंटडाउन श्रृंखला के 36वें दिन के रूप में किया गया, जिसका उद्देश्य योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसे दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में पद्म श्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र ने योग के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। उन्होंने आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच मानसिक शांति और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने में योग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर लगभग 650 प्रतिभागियों ने कॉमन योगा प्रोटोकॉल (CYP) सत्र में भाग लेकर विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का माहौल देखने को मिला, जहां सभी ने योग के लाभों को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत “स्वास्थ्य और ज्ञान के लिए योग” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। इस संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने आज के डिजिटल युग में बढ़ते मानसिक तनाव, चिंता और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की।

पहले सत्र में डॉ. बालाजी आर. ने युवाओं के लिए योग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि चेतना और जागरूकता का मार्ग है। उन्होंने बताया कि योगासन, प्राणायाम और ध्यान जैसी प्रक्रियाएं युवाओं में मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती हैं। उन्होंने सैल्यूटोजेनेसिस की अवधारणा को समझाते हुए स्वास्थ्य को केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन अवस्था बताया।

दूसरे सत्र में डॉ. लता सतीश ने डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य पर योग के प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग सूचना के अत्यधिक दबाव, तनाव और मानसिक थकान से जूझ रहे हैं। ऐसे में योग मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने योग के सिद्धांतों जैसे स्थिरता, संयम, श्रद्धा और विवेक को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि योग केवल अभ्यास नहीं, बल्कि एक जीवन जीने की कला है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है। यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य योग को हर व्यक्ति तक पहुंचाना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।