प्रधानमंत्री मोदी का यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ में संबोधन: भारत-यूरोप साझेदारी पर जोर

Mon 18-May-2026,01:38 PM IST +05:30

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प्रधानमंत्री मोदी का यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ में संबोधन: भारत-यूरोप साझेदारी पर जोर India Europe Relations
  • पीएम मोदी ने ERT बैठक को संबोधित किया. 

  • भारत-ईयू व्यापार और निवेश पर जोर. 

  • यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश का निमंत्रण. 

Delhi / Delhi :

Delhi / प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 17 मई 2026 को स्वीडन के गोथेनबर्ग में यूरोपीय उद्योग गोलमेज़ (ERT) को संबोधित किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोप और भारत के प्रमुख उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन वोल्वो ग्रुप की मेज़बानी में हुआ।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भरोसेमंद साझेदारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रधानमंत्री ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति का स्वागत किया और इसे दोनों क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापार, तकनीक, सेवाओं और आपूर्ति श्रृंखला में नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को भी भविष्य की बड़ी पहल बताया।

मोदी ने भारत को आज निवेश, नवाचार और निर्माण का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बताया। उन्होंने “डिज़ाइन इन इंडिया, मेक इन इंडिया, एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया” के विजन को दोहराते हुए यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का आमंत्रण दिया।

उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर की भी चर्चा की। साथ ही कहा कि भारत हरित ऊर्जा, एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोप के बीच मजबूत सप्लाई चेन, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने भारत के युवा और कुशल मानव संसाधन को वैश्विक विकास का बड़ा आधार बताया।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत-यूरोप CEO राउंडटेबल को हर साल आयोजित किया जाए और ERT में एक ‘इंडिया डेस्क’ स्थापित किया जाए, ताकि सहयोग को और मजबूत किया जा सके।

कुल मिलाकर, यह बैठक भारत और यूरोप के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने वाली साबित हुई, जिससे भविष्य में दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग और गहरा होने की उम्मीद है।