DGFT का बड़ा फैसला: सोने के आयात नियम सख्त, ज्वैलरी सेक्टर पर बढ़ा दबाव

Thu 14-May-2026,09:21 PM IST +05:30

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DGFT का बड़ा फैसला: सोने के आयात नियम सख्त, ज्वैलरी सेक्टर पर बढ़ा दबाव Gold Price India
  • DGFT ने सोने के आयात नियम किए सख्त. 

  • जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर पर नई पाबंदियां लागू. 

  • आयात सीमा और रिपोर्टिंग नियम अनिवार्य. 

Delhi / Delhi :

Delhi / सरकार ने सोने के आयात और ज्वैलरी सेक्टर को लेकर एक और बड़ा और सख्त कदम उठाया है। हाल ही में इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% करने के बाद अब DGFT ने जेम्स एंड ज्वैलरी निर्यातकों के लिए ड्यूटी-फ्री सोने के आयात से जुड़े नियम और कड़े कर दिए हैं। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के बढ़ते आयात बिल को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करना है।

नए नियमों के तहत अब एडवांस ऑथराइजेशन (AA) स्कीम में एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही आयात किया जा सकेगा। साथ ही, पहली बार लाइसेंस लेने वाले कारोबारियों की फैक्ट्री का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उत्पादन इकाई वास्तविक है और उसकी क्षमता कितनी है।

सरकार ने पुराने निर्यातकों के लिए भी नियम सख्त कर दिए हैं। अब नया लाइसेंस तभी मिलेगा जब पिछली निर्यात जिम्मेदारी का कम से कम 50% पूरा किया गया हो। इसके अलावा, हर 15 दिन में CA से प्रमाणित रिपोर्ट देना जरूरी होगा, जिसमें सोने के आयात और निर्यात का पूरा विवरण शामिल रहेगा।

सरकार का कहना है कि इन कदमों से पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत तरीके से होने वाले लेन-देन पर रोक लगेगी। क्षेत्रीय अधिकारी इन सभी आंकड़ों को हर महीने DGFT मुख्यालय को भेजेंगे ताकि केंद्रीय स्तर पर निगरानी मजबूत हो सके।

इन सख्त नियमों के पीछे असली वजह भारत का बढ़ता सोने का आयात है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का सोने का आयात 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि मात्रा थोड़ी घटी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण कुल बिल काफी बढ़ गया है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा स्विट्जरलैंड, यूएई और दक्षिण अफ्रीका से आयात करता है। ऐसे में सरकार लगातार यह कोशिश कर रही है कि देश का पैसा बाहर जाने की बजाय घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

हालांकि ज्वैलरी उद्योग इस फैसले से चिंतित है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल ने कहा है कि अचानक सख्ती से बाजार में अस्थिरता आ सकती है और ग्रे मार्केट या तस्करी बढ़ने का खतरा भी है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा और सोने की शुद्धता व कीमतों को लेकर सावधानी और बढ़ जाएगी।