शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में ICAR बैठक, कृषि सुधार और रोडमैप पर हुई चर्चा
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Agriculture News
ICAR EFC बैठक में कृषि योजनाओं की समीक्षा.
इंटीग्रेटेड फार्मिंग और कृषि रोडमैप पर जोर.
किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए निर्देश.
Delhi / केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली स्थित 12, सफदरजंग रोड कैंप कार्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (EFC) से संबंधित एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य देश में कृषि अनुसंधान, योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों की समीक्षा करना था, ताकि कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत, आधुनिक और लाभकारी बनाया जा सके।
बैठक के दौरान ICAR के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। ICAR के महानिदेशक तथा डेयर सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने केंद्रीय मंत्री को देशभर में चल रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यक्रमों, तकनीकी विकास और किसान हित में संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह परिषद वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए शोध और तकनीकों पर काम कर रही है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल सके।
डॉ. जाट ने यह भी बताया कि भविष्य की कार्ययोजना में कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नई तकनीकों, बीज सुधार, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को और तेज किया जा रहा है, ताकि किसानों की उत्पादकता बढ़े और लागत कम हो सके।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और करोड़ों लोगों की आजीविका इसी पर निर्भर करती है। ऐसे में यह आवश्यक है कि कृषि को केवल पारंपरिक गतिविधि के रूप में नहीं बल्कि एक आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी ऊर्जा इस दिशा में होनी चाहिए कि किसान अधिक उत्पादन करें, कम लागत में काम करें और उनकी आय में वृद्धि हो।
श्री चौहान ने विशेष रूप से इंटीग्रेटेड फार्मिंग (समेकित कृषि प्रणाली) को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को इस प्रणाली को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे खेती के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी और अन्य सहायक गतिविधियों को भी जोड़ा जा सके। इससे किसानों की आय के स्रोत बढ़ेंगे और कृषि अधिक स्थिर और लाभकारी बन सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को कृषि के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि बदलते मौसम और अनियमित वर्षा पैटर्न के कारण कृषि पर प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्यों की एग्रो-क्लाइमेटिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग कृषि रोडमैप तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्यों के सहयोग से इस दिशा में तेजी से काम किया जाए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए विशेष कृषि रोडमैप तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। जल्द ही इन राज्यों के लिए अलग-अलग रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि विकास सुनिश्चित हो सके।
केंद्रीय मंत्री ने ICAR की कार्ययोजना पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को और अधिक उत्साह और समर्पण के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समयबद्ध लक्ष्य हासिल करना बेहद जरूरी है, ताकि कृषि क्षेत्र में तेजी से सुधार दिखाई दे।
बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि कृषि अनुसंधान और किसानों तक तकनीक पहुंचाने की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा, जिससे भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।