राजनाथ सिंह का वियतनाम और दक्षिण कोरिया दौरा: रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
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India Vietnam Relations
राजनाथ सिंह का वियतनाम और कोरिया दौरा.
रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर जोर.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति पर चर्चा.
Delhi / रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 18 से 19 मई 2026 तक वियतनाम और 19 से 21 मई 2026 तक दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यात्रा से पहले अपने संदेश में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और इन दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को और गहरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाना और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को मजबूत करना है।
वियतनाम में यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है। इस दौरान रक्षा मंत्री वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच पहले से ही रक्षा सहयोग को लेकर 2030 तक का एक संयुक्त दृष्टिकोण तैयार किया गया है, जिसे आगे और मजबूत किया जाएगा।
इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे। यह कदम दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है।
इसके बाद रक्षा मंत्री दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे, जहां वे कोरिया गणराज्य के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ रक्षा सहयोग पर चर्चा करेंगे। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, तकनीकी साझेदारी और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (DAPA) के मंत्री से भी मुलाकात करेंगे और भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन भी है, जो कोरियाई युद्ध में भारत के योगदान को सम्मान देने का प्रतीक होगा। भारत ने शांति मिशन के तहत चिकित्सा सहायता और युद्धबंदियों के पुनर्वास में अहम भूमिका निभाई थी।
कुल मिलाकर यह दौरा भारत और वियतनाम तथा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा, कूटनीति और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती देने वाला साबित होगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को और सशक्त करेगा।